लाल कुआं: राजनीतिक-आर्थिक भ्रष्टाचार मिटाने के लिए भाजपा को सत्ता से बेदखल करना जरूरी : संजय शर्मा

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  • 💥अतिक्रमण हटाने के नाम पर चल रहा धामी सरकार का अभियान सांप्रदायिक और गरीब विरोधी : इंद्रेश मैखुरी

लालकुआं, 4 मार्च l संवाददाता भाकपा-माले की उत्तराखण्ड राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक पार्टी कार्यालय दीपक बोस भवन में आयोजित की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा माले की पोलित ब्यूरो की ओर से राज्य प्रभारी संजय शर्मा ने कहा कि, ” केंद्र की मोदी सरकार के दस साल देश के लिए तबाही का दशक सिद्ध हुआ है. लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों को यह सरकार बुलडोजर से रौंद डालना चाहती है. संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए इस सरकार को उखाड़ फेंकना जरूरी है.
भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा चर्चा करने वाली भाजपा आज विपक्षी विधायकों की खरीद-फरोख्त, दलों को तोड़ने, विपक्ष की सरकारों को गिराने में किसी भी हद तक जा रही है। आज वह चंडीगढ़ मेयर चुनाव के मॉडल को पूरे देश में थोपने में लगी हुई है। इलेक्टोरल बॉन्ड से एकत्रित पैसे से यह सब हो रहा है। भाजपा राज में राजनीतिक-आर्थिक भ्रष्टाचार चरम पर है। देश में नफरत की राजनीति फैला रही भाजपा को अन्य तमाम मुद्दों के साथ राजनीतिक-आर्थिक भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्ता से बेदखल करना हमारा एक प्रमुख मुद्दा होगा।”

उन्होंने कहा कि, “दिल्ली में रैट माइनर वकील हसन के घर को जिस प्रकार से बुलडोज कर दिया गया, वह दिखलाता है कि यूपी से शुरू हुआ यह बुलडोजर आज कहां तक पहुंच गया है। नवंबर महीने में ही उत्तराखंड में सुरंग में फंसे मजदूरों के बचाव कार्य के वे सबसे बड़े संगठक थे और पूरे देश ने उन्हें नेशनल हीरो माना था। और अब बिना किसी नोटिस के उनका घर गिरा दिया गया। यह बेहद शर्म की बात है। पहले सबको आवास देने की बात होती थी आज बुलडोज किया जा रहा है।”

भाकपा माले राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि, “उत्तराखंड सरकार ने वनभूलपुरा से लोगों को उजाड़ने का जो सिलसिला शुरू किया था, वह अब बागजाला, पुछड़ी समेत नये नये इलाकों की ओर बढ़ रहा है। अतिक्रमण हटाने के नाम पर चल रहा यह अभियान सांप्रदायिक और गरीब विरोधी है। वन भूमि, नज़ूल भूमि, खत्तों आदि पर दशकों से रह रहे लोगों को उजाड़ने के बजाय उनके नियमितिकरण और जमीन पर मालिकाना हक देने के लिए ठोस उपाय करना चाहिए। वनभूलपुरा में पुलिसिया उत्पीड़न की घटनाएं निरंतर जारी है। इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। वनभूलपुरा प्रकरण की न्यायिक जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि, “बिंदुखत्ता को मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल किया जाना, लोगों की आँख में धूल झोंकने वाला स्टंट भर है। जब बिंदुखत्ता की जनता सड़कों पर उतरने लगी है तो यह पुराना स्टंट फिर दोहराया गया है। 2005, 2009 और 2010 में भी तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने इस तरह की घोषणाएं की जो आज रद्दी की टोकरी में हैं, वर्तमान मुख्यमंत्री की घोषणा का यही हश्र होना है।”

उन्होंने कहा कि, जागेश्वर में एक हजार देवदार के पेड़ काटने के निर्णय की भाकपा (माले) तीव्र भर्त्सना करती है। भाजपाई बुलडोजर न केवल लोगों के आशियाने उजाड़ रहा है बल्कि प्रकृति और पर्यावरण को भी तबाह कर रहा है। इस प्रकृति और पर्यावरण विरोधी रुख कीमत चुकाते हुए जोशीमठ तबाह हुआ। एक साल के बाद जोशीमठ के पुनर्वास और स्थिरीकरण कोई उपाय पुष्कर सिंह धामी सरकार नहीं किया। अब जागेश्वर में देवदार के पेड़ काट कर नई तबाही का इंतजाम भाजपा सरकार कर रही है। इस विनाशकारी विकास के मॉडल को उलटने की जरूरत है।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह चौपट हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से इलाज के अभाव में गर्भवती महिलाओं और अन्य के इलाज के अभाव में प्राण गंवाने की खबरें निरंतर आ रही हैं। प्रदेश के अधिकांश अस्पताल सिर्फ रेफर सेंटर बने हुए हैं। स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा के मोर्चे पर डबल इंजन सरकार पूरी तरह विफल रही है। इसलिए इस सरकार को उखाड़ फेंकने की जरूरत है।

बैठक में भाजपा सरकार द्वारा बागजाला गौलापार, पुछड़ी रामनगर, बनभूलपुरा समेत राज्य के तमाम हिस्सों में अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर वन भूमि, नजूल, पट्टे की भूमि पर बसे गरीबों को उजाड़ने की भाजपाई मुहिम की तीखी आलोचना करते हुए मांग की गई कि पूरे राज्य में दशकों से वन भूमि, नजूल, पट्टे की भूमि पर बसी लाखों की आबादी को जो जहां है वहां का मालिकाना अधिकार दिया जाय।

यह भी तय किया गया कि, आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए राज्य की पांचों लोकसभा क्षेत्रों में इंडिया गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के लिए भाकपा माले पूरी ताकत से जुटेगी। इसके लिए इंडिया गठबंधन के दलों के साथ तालमेल के साथ पूरे राज्य में राजनीतिक प्रचार अभियान चलाया जाएगा।

राज्य कमेटी बैठक में माले पोलित ब्यूरो सदस्य संजय शर्मा, राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी, डा कैलाश पाण्डेय, के के बोरा, आंनद नेगी, अतुल सती, बहादुर सिंह जंगी, विमला रौथाण, ललित मटियाली, भुवन जोशी, कैलाश जोशी, जोगेंद्र लाल मौजूद रहे।

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