ज्योलीकोट (नैनीताल 😯एक महीने से क्षेत्र में पेयजल का संकट!👉 जल संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों तथा कर्मचारियों के द्वारा क्षेत्र की जनता को गुमराह किए जाने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा@

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ज्योलीकोट (नैनीताल) संवाददाता विगत एक महीने से ज्योलीकोट क्षेत्र में पेयजल का संकट तथा जल संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों तथा कर्मचारियों के द्वारा क्षेत्र की जनता को गुमराह किए जाने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मजेदार बात है कि बीते दिवस शनिवार को क्षेत्र की जनता द्वारा विभाग के खिलाफ आन्दोलन का बिगुल फूंक दिया तो रविवार को पेयजल आपूर्ति सुचारु हो गई। वही ग्रामीणों का आरोप है हर घर जल हर घर नल के तहत बिछाई जा रही करोड़ों रुपए की पाइप लाइन में मानकों की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों ने जांच और कार्य की गुणवत्ता बनाएं रखने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि ज्योलीकोट के बड़े इलाके में लगभग एक महीने से पेयजल का संकट बना हुआ था। जब विभागीय अधिकारीयों ने टाल मटोल किया और पानी नहीं मिला तो ग्रामीणों ने एकत्रित होकर विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुरानी पेयजल और निर्माणाधीन योजनाओं का स्वयं निरीक्षण किया तो देखा कि जो लाईन बिछाई गयी है वो बिल्कुल मानकों के विपरीत है पेयजल लाइन जमीन में दो फीट गहरी दबी होनी चाहिए लाईन कई जगह जमीन पर खुलीं पड़ी है या फिर मात्र तीन से छः इंच इन्च दबी हुई है, कार्य का विभागीय अधिकारीयों द्वारा निगरानी नहीं की जा रही है जिससे भविष्य में योजना का समुचित लाभ मिलने में संदेह है। और ये भी देखा कि बीते वर्ष पचास लाख रुपए से ज्यादा की की लागत से बनी डाडर पेयजल योजना पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गई है जिसके पाइप भी बह गये है जो कि विभाग की कार्य प्रणाली पर गम्भीर प्रश्न चिन्ह है। इस दौरान ग्रामीणों ने विभाग के अधिशासी अभियन्ता को फोन पर इसकी जानकारी दी जिस पर अभियन्ता ने समुचित कार्यवाही का आश्वासन डा ललित जोशी,खुशाली राम,हेमन्त बोरा, शेर सिंह, सुरेश पांडे, गोविंद पाठक, उमेश पाण्डे, कैलाश जोशी,संजय पांडे,गोविंद बर्गली, विरेंद्र जोशी, रमेश चंद्र,पुष्कर जोशी,पूरन प्रकाश, अजय साह,उमेश चंद्र,विक्रम धामी,पंकज पालीवाल,सहित अन्य लोग मौजूद थे। इस सम्बन्ध में सहायक अभियन्ता रवि पाठक ने कहा कि पुरानी लाइन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त थी जिस कारण आपूर्ति बाधित थी जिसे सुचारु कर दिया गया है। नई योजना में मानकों की अनदेखी ना हो इसका ध्यान रखा जा रहा है।

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