breaking Kashipur: बेतुके नियम; अनावश्यक टैक्स औद्योगिक विकास में पड़ रहे बाधक! ✔️उद्योगपति योगेश जिंदल ने सीएम को लिखा पत्र@अशोक गुलाटी editor-in-chief

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काशीपुर (उधम सिंह नगर )अशोक गुलाटी editor-in-chief। तराई क्षेत्र के जाने-माने उद्योगपति एवं समाजसेवी हमेशा शांत स्वभाव के रहने वाले योगेश जिंदल ने आज मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उद्योग में हो रहे संकट की पीड़ा बता दी है । सीएम को लिखे पत्र के मुताबिक प्रदेश में समय समय पर भूमि संबंधी नियमों में बदलाव और उद्योगों पर अनावश्यक रूप से लगाये जा रहे टैक्स औद्योगिक विकास में बाधक बन रहे हैं। इससे निवेशकों की प्रदेश में निवेश में रूचि कम हो रही हैं। इस सम्बंध में काशीपुर के उद्योगपति योगेश जिंदल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर उद्योगपतियों की समस्याओं से अवगत कराते हुए नियमों का सरलीकरण और अनावश्यक टैक्स रोकने की मांग की है।

सीएम को लिखे पत्र में उद्योगपति जिंदल ने कहा है कि प्रदेश के विकास में समय-समय पर कुछ इस तरह के परिवर्तन हो रहे है जिनसे जिससे प्रदेश एवं बाहर से आने वाले निवेशकों में संशय बना रहता है। श्री जिंदल का कहना है कि औद्योगिक आस्थानो में स्थापित उद्योगों पर नगर निकायों अथवा नगर पंचायतों द्वारा अनावश्यक रूप से, अवैज्ञानिक रूप से कर आरोपित किया जा रहा है। पूर्व में जिला पंचायत द्वारा कर आरोपित किया गया था माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 2012 मे दिये गये निर्णय में इसको गलत ठहराया गया। लेकिन वर्तमान में उन्ही क्षेत्रे को नगर निगम सीमा में लेने के पश्चात नगर निगम द्वारा उद्योग कर दर, समान्य दर से दो गुना से पांच गुना रखी गयी है जोकि न्यायसंगत नही है । औद्योगिक विनिमय क्षेत्र घोषित करते समय यह प्रावधान किया गया था कि औद्योगिक आस्थान के रख रखाव, अवस्थापना सुविधाओं के विकास का कार्य आस्थान के प्रमोटरो द्वारा स्वयं किया जायेगा। उक्त़ क्षेत्रे का रख रखाव औद्योगिक आस्थान स्वतः ही करते आ रहे है और इसमें नगर निगम का कोई भी सहयोग कभी भी प्राप्त नही हुआ है। काशीपुर महायोजना 2041 के अंर्तगत पिछले 15 वर्षों से स्थापित उद्योगों को भी डेविएटेड इंडस्ट्री में रखकर अनावश्यक रूप से हतोत्साहित किया जा रहा है। नारायण नगर इण्डस्ट्रियल स्टेट की घोषणा उत्तराखण्ड शासन औद्योगिक विकास विभाग द्वारा सन् 2005 में की गयी थी और इसका विस्तार 2016 की अधिसूचना से किया गया था। उक्त़ आस्थान में लगी हुयी इकाईयों के नक्शे राज्य औद्योगिक विकास अधिकरण के द्वारा अनुमोदित किये जाते है। इस सब के बाद भी इन्हें डेविएटेड इंडस्ट्री में अंकित करना विचारणीय है।

उद्योगपति जिंदल ने पत्र में आगे कहा कि सर्किल रेट इस सीमा तक बढ़ा दिये गये है कि किसी उद्योग को अन्य उद्यमी को हस्तांतरित करने की संभावनायें समाप्त हो गयी हैं। वर्तमान में लागू जमीनों के सर्किल रेट 13-01-2020 को लागू दरो से दो गुना से तीन गुना कर दिये गये हैं इससे औद्योगीकरण के लिए खरीदी जाने वाली भूमि पर स्टाम्प की दर अत्यधिक हो गयी है। इसी तरह से बाजपुर में दिनांक 03-10-2020 को जिलाधिकारी द्वारा 4805 एकड़ जमीन की खरीद-बेच रोक दी गयी है। उक्त़ भूमि में क्रय-विक्रय के अधिकार समाप्त कर दिये है तदोपरांत भूमि का लेंड यूज भी बदला नहीं जा सकता जिन उद्यमियों ने बाजपुर में उद्योग लगाने के लिए शासन द्वारा एमओयू कर भूमि खरीदने के अनुबंध किये थे वे सभी अधर में अटक गये है। जिंदल ने बताया कि हमारे ग्रुप द्वारा भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवाहन पर इनवेस्टर समिट 2018 में बाजपुर में उद्योग लगाने के लिए एमओयू साइन कर भूमि खरीदने हेतु निवेश किया था लेकिन वह सभी निवेश अधर में हैं । पत्र में श्री जिंदल ने सीएम से अनुरोध किया है कि प्रदेश की प्रतिष्ठा व विकास को ध्यान में रखते हुये उद्योगो के स्थापित होने के पश्चात अनेक प्रकार के कर व उससे होने वाले विकास से होने वाले राजस्व का आंकलन किया जाये। उत्तर प्रदेश के विकास के वृहद आकलन के अनुसार ही उत्तराखण्ड में प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी सोच और दूरदर्शिता को भी दूरगामी बनाना होगा जिससे पूंजी विनियोजन के प्रदेश में अवरोधों व दूर तक जा रही नकारात्मक छवि को सुधारा जा सके।

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