बिग ब्रेकिंग देहरादून/ उधम सिंह नगर आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी की दीवारों पर चीख- चीख कर कलंकित होती भ्रष्टाचार की दास्तान ! 👁️ देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल का खबर का धमाका!!! विजिलेंस की टीम पहुंची जांच के लिए देहरादून@ 😲उधम सिंह नगर😲 पीटी टीचर संजीव कुमार पांडे का आयुर्वेदिक ‌विश्वविद्यालय देहरादून में उप कुलसचिव पर नियुक्ति प्रकरण’ ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ हैरान करने वाला हाईटेक खेला! 👁️देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल का हुआ खबर का धमाका@👉आखिर क्यों बचाया जा रहा है इस पी .टी टीचर को? कुलपति ने पोल खोल दी; कौन बचा रहा है पीटी टीचर को? 🌘 हैरतअंगेज हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल खोलती सनसनीखेज (पार्ट-4) अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल की Exclusive report:-part 4 jari….!!

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आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति देहरादून द्वारा गाजीपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज से बर्खास्त डॉ राकेश कुमार मिश्रा द्वारा अपने रिश्तेदार उप कुलसचिव पीटी मास्टर संजीव कुमार पांडे को बचाने के लिए यूनिवर्सिटी को बदनाम कर रहे हैं भारत सरकार को भेजे गए पत्र एवं देहरादून एसएसपी को प्रेषित पत्र में कुलपति ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है पत्र की कॉपी संलग्न


देहरादून / उधम सिंह नगर (अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ)। उत्तराखंड राज्य बनने के लिए सैकड़ों युवाओं माताओं बहनों ने कुर्बानी दी थी कि छोटा राज्य बनेगा राज्य में खुशहाली आएगी और युवाओं को परिवार का पालन पोषण होगा उन्हें रोजगार मिलेगा मिलेगा और उन्हें फ्लाइंग कर विभिन्न राज्यों में रोटी रोजी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा परंतु राज्य बनने के बाद बिल्कुल उल्टा हो गया है कुछ महा भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारियों ने ऐसा खेला खेला है ; कि आप सच्ची बात सुनकर दांतों तले उंगली दबा लेंगे। जिस तरह से राज्य में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है; राज को बनाने में हुए शहीद हुए आंदोलनकारियों की आत्माएं निःसंदेह दुखी होती होंगी? इस तरह का भ्रष्टाचार देखकर कहती हो कि क्या इसीलिए हमने इस राज्य की स्थापना की थी? ऐसे ही सनसनीखेज भ्रष्टाचार आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून का बताने जा रहे हैं। उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार कुलपति चीख चीख कर कह रहा है कि भ्रष्टाचार हुआ है भ्रष्टाचार हुआ है; परंतु इसकी कोई सुनने वाला नहीं है जब की देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल ने चैनल सनसनीखेज खबर का खुलासा किया; तो विजिलेंस की टीम आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून में डिप्टी रजिस्ट्रार संजीव कुमार पांडे उनसे पूछा की गया कि आप डॉक्टर है या नहीं ? उनके सवाल से वह भौचक्का रह गया परंतु वह सवाल का जवाब देने में असमर्थ रहे ; । सूत्रों के मुताबिक के हर सवाल का जवाब गोलमोल देते रहे। सूत्रों का यहां तक कहना है कि विजिलेंस की टीम ने जब उनसे पूछा आखिर आप अपने आखिर वह अपने मूल विभाग मे क्यों नहीं गए बिना अनुमति के कैसे इतने साल तक यहां जमे रहे सूत्रों के मुताबिक हर सवाल जवाब पर वह खामोश रहे; सूत्रों के मुताबिक श्री पांडे ने कई बार पानी मंगाकर पिया हर सवालों के जवाब से बचते रहे बाहर टीम उनकी बातों से संतोष नहीं थी; तत्पश्चात विजिलेंस की टीम ने कुलपति सहित अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ की परंतु वह संतुष्ट नहीं हुए। गौरतलब है कि कि हमने आपको पिछले अंक में बताया था कि मां-बाप का एक सपना होता है कि उनका बेटा बड़ा होकर आईएएस आईपीएस इंजीनियर बड़े पदों पर बने इसके लिए वह सब कुछ निछावर कर देते हैं हर युवाओं का भी सपना होता है बड़ा होकर आईएएस आईपीएस बने और देश और मां बाप का नाम रोशन करूं। इसके लिए रात दिन तैयारी करते हैं और कंपटीशन में बैठते हैं लाखों युवा पेपर देते हैं उसमें कुछ भी युवा पास हो पाते हैं। परंतु यहां तो सब उल्टा पुल्टा हो गया ना पढ़ाई ना कंपटीशन एक रुद्रपुर में एक जूनियर स्कूल में पीटी टीचर ने आयुर्वेदिक विद्यालय देहरादून बर्खास्त बहुत चर्चित भ्रष्टाचार की इमारत लिखने वाले पूर्व रजिस्टार मृत्युंजय कुमार मिश्रा अभी हाल में ही ढाई साल जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट जमानत पर छूटे हैं; उसके खिलाफ अभी भी विजिलेंस एवं उच्च स्तरीय जांच चल रही है; श्री मिश्रा ने पीटी टीचर संजीव कुमार पांडे के साथ साथ सांठगांठ कर इस तरह का खेला खेला कि भ्रष्टाचार को भी मात दे दी और उन्होंने कुछ ही सालों में सर्वश्री अपने दुलारे प्यारे आंखों के तारे और भ्रष्टाचार खेल के साथी संजीव कुमार कुमार पांडे को कुछ ही महीनों में ‌आईएएस के वेतनमान के बराबर पहुंचा दिया । इस खेला से आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के अफसर दंग रह गए। हैरतअंगेज बात यह थी कि विभाग के कुलपति ने इस नियुक्ति पर घोर आपत्ति की थी परंतु इस सभी को दरकिनार करते हुए सचिव ने इनकी प्रमोशन की नियुक्ति पत्र हस्ताक्षर कर दिए। यह हैरतअंगेज कारनामा उत्तराखंड सरकार का है; जबकि यह आयुष विभाग देहरादून स्वयं युवा तेजतर्रार ईमानदार भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लेकर पुष्कर सिंह धामी रात दिन एक करें हुए हैं। वही नौकरशाही किस क़दर खेला रहे हैं यह चौंकाने वाला मामला हम आपको बताने जा रहे हैं; आप दांतो तले उंगली दबा लेंगे। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत उत्तराखंड उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून की स्थापना 2010 में हुई थी; इसके लिए सहायक कुलसचिव की आवश्यकता थी; जिसको शिक्षा विभाग ने लिए उधम सिंह नगर के मुख्यालय रुद्रपुर में पीटी टीचर कार्यरत संजीव कुमार पांडे को 1 साल के लिए diptation में सहायक कुलसचिव के पद पर भेजा गया। अत्यंत चतुर चाणक्य नीति संजीव कुमार पांडे ने विश्वविद्यालय में जाते ही कुछ सालों में पूर्व निलंबित रजिस्टर मृत्युंजय कुमार मिश्रा से मिलाकर ऐसा खेला खेला कि सभी नियमों को ताक में रखकर 2016 में संजीव कुमार पांडे को सहायक कुलसचिव सचिव स्थाई बना दिया। मजेदार बात यह थी कि संबंधित शिक्षा विभाग कुंभकरण नींद सोता रहा; जब कि वह 1 साल के लिए श्री पांडे diptation में गया था; इस दौरान 6 साल तक विभाग ने सुध नहीं ली इस पर पांडे और मनमाने तौर पर उतर

गया। विश्वविद्यालय में श्री पांडे का इस कदर दबदबा हो गया उससे कर्मचारी अधिकारी भी डरने लगे; क्योंकि भ्रष्ट निलंबित रजिस्टर का आंखों का तारा श्री पांडे बन चुका था वह हर मनमाने काम करने शुरू कर दिए थे। स्मरणीय है कि सहायक कुलसचिव पद पर सीधी शासन द्वारा विज्ञापन निकालकर भर्ती निकाली जाती है जिसमें केवल आयुर्वेदिक पीएचडी डॉक्टर ही इस पद के लिए योग से होते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि श्री पांडे पीटी टीचर हैं। जबकि इसका मूल विभाग स्कूल शिक्षा विभाग है । जबकि यह सामूहिक ग के श्रेणी में आते हैं; श्री पांडे को सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए राजपत्रित अधिकारी अधिकारी बना दिया गया। इधर दूसरी और रुद्रपुर के जागरूक नागरिक सीपी गंगवार ने मुख्य सचिव को एक शिकायती पत्र एफिडेविट के साथ प्रेषित किया था और इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। प्रमुख सचिव आयुष देहरादून ने इस मामले को गंभीरता से देखते हुए आयुष एवं विभाग को जांच के आदेश दिए थे इधर श्री पांडे का इस क़दर खेला दबदबा था कि जांच को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हमने आपको( पार्ट 3) में बताया था। इस नियुक्ति के खिलाफ देश के विख्यात एवं मरम के विशेषज्ञ चिकित्सक प्रोफेसर डॉक्टर कुलपति सुनील कुमार जोशी ने पत्रांक 137 ; 21 -4 2022 को सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा अनुभाग उत्तराखंड शासन उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर पांडे की नियुक्ति पर आपत्ति की थी; परंतु इसके बाद भी शासन ने इसको गंभीरता से नहीं लिया; और इनके पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। गौर करने की बात यह है कि यदि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय ने पद हेतु समाचार पत्रों में रिक्त पद के लिए प्रकाशित करते जिससे हजारों पीएचडी करे हुए आयुर्वेदिक डॉक्टर बेरोजगार बैठे हुए हैं जबकि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की ही नियुक्ति हो सकती है। आश्चर्य की बात यह है कि कुलपति ने भारत सरकार को पत्र लिखा है गाजीपुर एक होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज से बर्खास्त एक प्रोफेसर राकेश कुमार मिश्रा आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की गोपनीय ढंग से पत्र लेकर व्हाट्सएप फेसबुक सोशल मीडिया में डाल रहा है इससे विश्वविद्यालय की बदनामी हो रही है और इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है; क्योंकि इसका मुख्य कारण विवादित सहायक डिप्टी रजिस्ट्रार संजीव कुमार पांडे का रिश्तेदार होना है। जोकि पांडे का रिश्तेदार है इसके कारनामे के चलते गाजीपुर कॉलेज से बर्खास्त कर दिया गया था । वर्तमान में राजकोट (गुजरात) एक निजी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में कार्यरत है। वह पांडे को बचाने के लिए विभिन्न विभिन्न तरह के हथकंडे अपना रहा है । जिससे विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है। सूत्रों के अनुसार ध्यान देने की बात यह है कि इमानदार कुलपति व रजिस्ट्रार की बदनामी करने के लिए वह हर तरह के हथकंडे अपना रहा है। जिससे कि उनकी ईमानदारी की छवि पर बट्टा लगे ; उनसे समझौता करें ‌‌?दूसरी हो देवभमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल लगातार खबर को प्रमुखता से छापने के कारण विजिलेंस टीम ने 2 घंटे तक संजीव कुमार पांडे से पूछताछ की है वह सवालों का जवाब नहीं दे पाए; सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस की टीम इससे संतुष्ट नहीं थी; ध्यान देने की बात यह है कि ……

क्या वास्तविक रूप से विवादित हो गया ?आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून; विज्ञापन के नीचे विवादित विश्व विद्यालय की मुख्य द्वार

वर्तमान के कुलपति एवं रजिस्टर चीख चीख कर शासन को पत्र भेज रहे हैं कि पांडे की नियुक्ति गलत हुई है और इसमें भ्रष्टाचार का खेल हुआ है ; इसके बाद भी शासन बचाने में जुटा हुआ है। जिससे सरकार की ‌लोकप्रियता पर निसंदेह बट्टा लग रहा है। जबकि यह आयुष विभाग युवा ईमानदार लोकप्रिय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास है जो जीरो टोलरेंस की बात जोर शोर से उठा रहे हैं । जागरूक नागरिकों का कहना था कि इस तरह सरकार की लोकप्रियता को बट्टा लग रहा है शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए।… अभी तो धमाकेदार खेला बाकी है अगले अंक में:-कैसे आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी की दीवारों भी चीख चीख कर भ्रष्टाचार की दास्तान बता रही है अगले अंक में ::-(सीरियल पांचवे अंक में)

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