खटीमा :पूर्व सैनिकों को मिला तोहफा सी एम ने किया सी एस डी कैंटीन व सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण,मुख्यमंत्री का रोड शो में किया जनता व जनप्रतिनिधियों ने न पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत,मुख्यमंत्री ने किया 60 वीरनारियों व 80 वीर योद्धाओं को सम्मानित!!✍️ Ashok gulati एडिटर इन चीफ

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खटीमा:

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सी एस डी कैंटीन ख़ेतलसंडा मे सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा स्व0 सूबेदार श्री शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह मे बतौर मुख्यातिथि के रूप मे शिरकत की तथा 715.51 लाख की धनराशि से नवनिर्मित सी एस डी कैंटीन,162.26 लाख से निर्मित सैनिक मिलन केन्द्र का लोकार्पण किया।

एनसीसी द्वारा बैंड द्वारा मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। कार्यक्रम मे सर्वप्रथम मुख्यमंत्री ने अपने पिता स्व0 सूबेदार शेर सिंह धामी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। इसके उपरांत उन्होंने नैनीताल, ऊधम सिंह नगर व चम्पावत जिलों के शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उनको नमन किया। मुख्यमंत्री ने शहीदों के परिजनों,वीरनारियों को शॉल ओढ़ाकर एवं उपहार देकर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पिताजी स्व. सूबेदार शेर सिंह धामी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सैनिक सम्मान समारोह में आये सभी वीर सैनिकों, वीरांगनाओं, सैन्य अधिकारियों और खटीमा क्षेत्र की जनता का स्वागत व अभिनंदन किया। उन्होंने इस अवसर पर 60 वीर नारियों और 80 वीर योद्धाओं को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज खटीमा में नवनिर्मित सीएसडी कैंटीन एवं अत्याधुनिक सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण करने का सुअवसर भी प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर इस आयोजन से जुड़े सभी आयोजकों, सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन के सभी स्वयंसेवकों और खटीमा क्षेत्र के मेरे समस्त भाई-बहनों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मेरे पूज्य पिताजी की पुण्य स्मृति में समर्पित इस समारोह का भावपूर्ण आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि 6 वर्ष पूर्व आज का ये दिन मेरे जीवन का सबसे पीड़ादायक और दुःखद दिन था, जब मैंने अपने प्रेरणास्रोत पूज्य पिताजी को खो दिया। उनके विचार, उनके सिद्धांत और उनका संघर्षपूर्ण जीवन आज भी हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्दी को देखकर मेरे मन में गर्व का भाव उत्पन्न होता था और साथ ही जिज्ञासा भी होती थी, क्योंकि पिताजी हमेशा अपनी वर्दी को बड़ा संभालकर और बड़े सलीके से रखते थे। उनका मानना था कि एक फौजी के लिए उसकी वर्दी ही उसका सम्मान होती है। और ये एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी होती है, देश की सेवा करने की जिम्मेदारी। उन्होंने मुझे राजनीति में आने से पहले ही ये समझा दिया था कि राजनीति कोई पद प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जनभावनाओं को समझकर उनके दुःख-दर्द में सहभागी बनने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए स्वयं को समर्पित करने का माध्यम है। मेरे लिए वे जीवनभर अनुशासन, ईमानदारी और समाज के प्रति जिम्मेदारी के प्रतीक रहे। श्री धामी ने कहा कि पिताजी ने मुझे सिखाया कि राष्ट्र सर्वोपरि है और बाकी सब उसके बाद आता है। उन्होंने कहा कि आज इतने वर्षों बाद भी जब मैं, पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो यह महसूस करता हूँ कि मैं जो कुछ भी कर पा रहा हूँ, उसमें पिताजी द्वारा दिए गए संस्कारों का ही सबसे बड़ा योगदान है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मेरे पिताजी ने 28 वर्षों तक सेना की महार रेजिमेंट में अपनी सेवाएं देते हुए, 1962 में हुए भारत चीन युद्ध, 1965 और 1971 में हुए भारत पाक युद्ध के साथ ही ऑपरेशन ब्लूस्टार व ऑपरेशन रक्षक जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में अपना अहम् योगदान दिया। उन्होंने कहा कि मुझे याद है, कि वे किस प्रकार मुझे उन जवानों की देशभक्ति, पराक्रम और बलिदान की कहानियां सुनाया करते थे, जिन्होनें हँसते-हँसते देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। जिनको मैं बड़े ध्यान से सुनता था और वीरता की उन कथाओं को सुन कर मुझे ऐसा लगता था कि सेना में साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि महामानव होते हैं। उन्होंने कहा कि आज मैं, सेना में तो नहीं हूं परंतु वीर सैनिकों को अपना आदर्श मानकर राष्ट्र सेवा में अपना यथासंभव योगदान सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा हूं। एक सैनिक पुत्र होने के नाते, आज मुझे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों को देखकर अत्यंत गर्व की अनुभूति होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब भारत को छोटे से छोटे रक्षा उपकरणों के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में भारत रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो गया है। आज “मेक इन इंडिया” से “मेक फॉर द वर्ल्ड” तक की ये यात्रा हमारे सामर्थ्य और बढ़ती हुई शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, वो वर्ष 2024-25 में तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 1.54 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया है। इसी प्रकार, रक्षा निर्यात भी उल्लेखनीय वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो वर्ष 2014 के पहले 1 हजार करोड़ रुपये से भी कम था। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया के 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण, हथियार और अन्य रक्षा सामग्रियां उपलब्ध करा रहा है, जो इस बात का भी प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक रक्षा क्षेत्र में एक विश्वसनीय और मजबूत साझेदार बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब आतंकवादियों ने पहलगाम में हमारी माताओं-बहनों की आंखों के सामने बेरहमी से उनके सुहागों को उजाड़ दिया, तब ऑपरेशन सिंदूर द्वारा हमने ना सिर्फ उनके सिंदूर का बदला लिया बल्कि आतंकवादियों और उनके अड्डों के खात्मे के साथ ही विश्व को भारत की मजबूत सैन्य शक्ति का परिचय भी दे दिया। आज हमारी राज्य सरकार भी आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में शहीदों, सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसमें चाहें शहीदों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 5 गुना तक बढ़ाना हो, आश्रितों को सरकारी नौकरी देना हो या पूर्व सैनिकों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करना हो, हम हर स्तर पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेन्सन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अंलकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की है। हमने परमवीर चक्र से अलंकृत सैनिक को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढाकर डेढ़ करोड़ रुपये करने का कार्य किया है, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के वीर बलिदानियों की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए हम देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण भी करा रहे हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि हमनें बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का भी निर्णय लिया है और सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि को भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया है। हम प्रदेश में बलिदानियों के आश्रितों को नौकरी पूर्व प्रशिक्षण तथा पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ भी संचालित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों हेतु सरकारी बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था करने के साथ-साथ सेवारत व पूर्व सैनिकों हेतु 25 लाख रुपए मूल्य की स्थायी सम्पत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। यहाँ की पावन माटी में जन्मे वीर सपूतों ने माँ भारती के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया है। उन्होंने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं, एक सैनिक का पुत्र हूँ, मैं, सैनिक परिवारों के त्याग, संस्कार और संघर्ष को बहुत करीब से समझता हूँ। इसलिए मैं, आप सभी को ये विश्वास दिलाता हूँ, हमारी सरकार सैनिकों को राष्ट्र का सर्वोच्च नायक मानते हुए, उनके सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण के अपने “विकल्प रहित संकल्प” को पूर्ण करने के लिए इसी प्रकार निरंतर कार्य करती रहेगी।

इस अवसर पर कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि इस सैनिक सम्मान समारोह में सैनिको एवं उनके परिजनों को सम्मानित करने का अवसर मिला है यह हमारे लिए सौभाग्य कि बात है। उन्होंने कहा कि धामी सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहीद सैनिको के परिजनों को सरकारी नौकरी, वीरांगनाओं के पेंशन बढ़ाने का काम धामी सरकार ने किया। उन्होंने कहा कि 28 नदियों से जल व सैनिकों के घर से मिट्टी लेकर आज देहरादून में 5 वां धाम सैन्य धाम बनाया गया है। उन्होंने कहा बनबसा में सैनिक सामुदायिक भवन का निर्माण किया जायेगा।

सांसद अजय भट्ट,कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक राजस्थान कुलदीप धनकड़,दर्जा मंत्री विनय रुहेला ने भी संबोधित किया व स्वर्गीय सूबेदार श्री शेर सिंह धामी जी नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में श्रीमती विशना देवी, गीता धामी, कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, गणेश जोशी, राम सिंह कैड़ा,दर्जामंत्री विनय रोहेला,अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा, फरजाना बेगम,हेमराज, ध्रुव रौतेला,विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा,विधायक राजस्थान कुलदीप धनकड़, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य,जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मेयर विकास शर्मा,दीपक बाली,गजराज बिष्ट,नगर पालिका अध्यक्ष रमेश जोशी,प्रेम सिंह टूरना,ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा,पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, लेफ़्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता,जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, एसएसपी अजय गणपति, एसपी चम्पावत रेखा यादव, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, एसपी जितेन्द्र चौधरी, एएसपी डॉ उत्तम सिंह नेगी,पूर्व सैनिक अध्यक्ष गम्भीर सिंह धामी,भानी चंद सहित पूर्व सैनिक, गणमान्य आदि उपस्थित थे।

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