रानीखेत, निवासी संदीप पाठक के विरुद्ध चल रही घरेलु हिंसा एवं दहेज़ उत्पीरण मे 498अ की कार्यवाही पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक उल्लेखनीय फैसला सूनाते हुए कहा है की छोटी मोटी नौक झौक एवं तथ्यहीन आरोपी को घरेलु हिंसा नहीं माना जा सकता है,यहाँ दिल्ली उच्च न्यायलय ने एक नज़ीर प्रस्तुत करते हुए पाया की महिला द्वारा लगाए गये आरोप मनगरट एवं झूठे है,जो की कानूनी प्रक्रिया का गलत लाभ लेने की मंशा से लगाए गये है।न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा द्वारा दिये गये निर्णय मै स्पस्ट किया गया की न्यायलय ने आरोपों की पड़ताल करते समय यह पाया की आरोप निराधार मन गणत एवं न्यायिक प्रक्रिया का दूरूपयोग करने की मंशा से लगाए गये है…

अधिवक्ता चिन्मय भट्ट ने हमारे संवादददाता को बताया की केवल महिला होने का फायदा उठाकर कानूनी प्रक्रिया का दूरूपयोग गलत है। ओर उन्होंने उक्त केस को लड़कर अपने मुवकील को जीत दिलाकर एक नज़ीर प्रस्तुत की है।