टनकपुर:नन्धौर में ईको-टूरिज्म की नई उड़ान, युवाओं के लिए रोजगार का भरोसा! राजीव गुप्ता की रिपोर्ट

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चम्पावत :जनपद के सीमांत क्षेत्र टनकपुर से सटे नन्धौर वन्यजीव अभ्यारण में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की पहल स्थानीय लोगों के लिए आशा की नई किरण बनकर सामने आई है। ककराली गेट से वाइल्डलाइफ सफारी के लिए जिप्सी/योद्धा जैसे वाहनों के संचालन का अवसर न केवल पर्यटन को नई पहचान देगा, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का मजबूत माध्यम भी बनेगा।
घने जंगलों, समृद्ध जैव विविधता और शांत प्राकृतिक वातावरण से परिपूर्ण नन्धौर क्षेत्र पहले से ही प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। अब ईको-टूरिज्म गतिविधियों के संगठित संचालन से यहां पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत वाहन क्रय पर अनुदान की व्यवस्था कर सरकार ने स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है।
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें पर्वतीय क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उदार अनुदान का प्रावधान किया गया है। जिप्सी, टैक्सी, कैरावैन अथवा अन्य सफारी वाहनों के माध्यम से युवा सीधे पर्यटन से जुड़ सकेंगे। इससे न केवल उनकी आय के स्रोत बढ़ेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर होटल, गाइड, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।
टनकपुर जैसे सीमांत क्षेत्र, जो लंबे समय से विकास के नए अवसरों की प्रतीक्षा में रहे हैं, उनके लिए यह पहल विशेष महत्व रखती है। सरकार की यह सोच कि पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को केंद्र में रखा जाए, वास्तव में “विकास के साथ संरक्षण” की भावना को साकार करती है।
नन्धौर वाइल्डलाइफ सफारी के माध्यम से जहां पर्यटक देवभूमि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का अनुभव करेंगे, वहीं स्थानीय युवा अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। यह योजना निश्चय ही चम्पावत जनपद में पर्यटन, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अध्याय की शुरुआत साबित

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