रुद्रपुर :रामलीला मंच पर महापौर ने की कई विकास कार्यों की घोषणा,शहर की प्रमुख रामलीला में दूसरे दिन महापौर ने किया लीला का शुभारम्भ! Ashok Gulati editor in chief

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रुद्रपुर। नगर की प्रसिद्ध एवं सबसे पुरानी श्रीरामलीला कमेटी द्वारा आयोजित भव्य रामलीला मंचन के दूसरे दिन का शुभारंभ नगर के महापौर विकास शर्मा ने प्रभु श्रीराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। मंचन की शुरुआत गणेश वंदना और श्रीराम वंदना से हुई, जिसके पश्चात मंच पर एक के बाद एक भावनाओं से परिपूर्ण और शिक्षाप्रद दृश्यों का सुंदर प्रदर्शन किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में मंच से संबोधित करते हुए महापौर विकास शर्मा ने कहा कि रामलीला हमारी संस्कृति, परंपरा और मर्यादाओं का जीता-जागता प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला आयोजन है। श्रीराम का चरित्र हमें सत्य, धर्म, त्याग और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है। उन्होंने रामलीला समिति को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि नगर निगम रुद्रपुर द्वारा नवरात्रों के अवसर पर नगर में अनेक विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जिसमें धार्मिक स्थलों की सफाई, साज-सज्जा और सौंदर्यीकरण विशेष रूप से शामिल है।

महापौर ने रामलीला मंच की सुविधाओं में वृद्धि हेतु नगर निगम की ओर से मंच पर शेड निर्माण, मिट्टी भरान और पक्के फर्श के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह कार्य शीघ्र आरंभ कराया जाएगा ताकि आने वाले वर्षों में यह रामलीला और अधिक भव्यता के साथ प्रस्तुत की जा सके। उन्होंने मंच पर अभिनय कर रहे कलाकारों और सेवा दे रहे स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान सराहनीय और प्रेरणादायी है।

दूसरे दिन की लीला में सर्वप्रथम वेदवती और रावण संवाद का मंचन हुआ, जिसमें दर्शाया गया कि वेदवती भगवान विष्णु की परम भक्त थीं और उन्हें पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रही थीं। तभी रावण की दृष्टि उन पर पड़ी और वह उन्हें जबरन ले जाने का प्रयास करने लगा। तपस्या भंग होने और अपमान से आहत वेदवती ने अग्निकुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए तथा रावण को श्राप दिया कि एक स्त्री ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी।

इसके पश्चात श्रवण कुमार की मार्मिक कथा मंचित की गई। श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को कांवर में बिठाकर तीर्थ यात्रा पर निकलते हैं। जब वे सरयू नदी से जल भरने जाते हैं, तो आखेट पर निकले राजा दशरथ उन्हें वन्य पशु समझकर शब्दभेदी बाण से घायल कर देते हैं। श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है और जब दशरथ उनके माता-पिता को जल पिलाते हुए इस घटना की जानकारी देते हैं, तो वे पुत्र वियोग में तड़प-तड़पकर प्राण त्याग देते हैं और राजा दशरथ को श्राप देते हैं कि वह भी पुत्र वियोग में तड़पेंगे।

इसके बाद सीता जन्म की सुंदर लीला का मंचन हुआ, जिसमें राजा जनक द्वारा स्वर्ण हल चलाते समय भूमि से प्राप्त कन्या को सीता नाम दिया जाता है। वहीं अयोध्या में महाराज दशरथ पुत्र प्राप्ति की कामना से यज्ञ कराते हैं। यज्ञ के दौरान वेद मंत्रों की गूंज और समिधा की सुगंध से पूरा वातावरण पावन हो उठता है। यज्ञ के फलस्वरूप दशरथ को चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्राप्ति होती है, जिससे अयोध्या महलों में हर्षाेल्लास का वातावरण छा जाता है और ढोल-नगाड़े गूंजने लगते हैं।

रामलीला के विभिन्न दृश्यों में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। रावण की भूमिका में रमन अरोरा, वेदवती के रूप में सुमित आनंद, श्रवण कुमार की भूमिका में पुलकित बाम्बा, माता-पिता के रूप में नरेश छाबड़ा और शांतनु मनोज मुंजाल, राजा दशरथ के रूप में प्रेम खुराना, राजा जनक के रूप में अनिल तनेजा, गुरु वशिष्ठ के रूप में मनोज मुंजाल, कौशल्या के रूप में सुमित आनंद, सुमित्रा के रूप में अग्रिम सचदेवा, कैकयी के रूप में हर्ष नरूला, सुमंत के रूप में सचिन आनंद, बालिका सीता के रूप में सीता भुड्डी और बालक राम के रूप में अनहद साहनी ने सजीव अभिनय कर मंचन को जीवंत बना दिया।

मंच संचालन सुशील गाबा, विजय रंहहं और संदीप धीर ने प्रभावशाली ढंग से किया। इस अवसर पर पार्षद विष्णु, पार्षद चिराग कालड़ा, गौरव जुयाल, प्रवीण यादव, सन्नी चुघ, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल, महामंत्री विजय अरोरा, कोषाध्यक्ष अमित गंभीर सीए, समन्वयक नरेश शर्मा, अमित अरोरा बोबी, राजेश छाबड़ा, मोहन लाल भुड्डी, महावीर आजाद, राकेश सुखीजा, मनोज गाबा, कर्मचंद राजदेव, सुभाष खंडेलवाल, आशीष ग्रोवर आशू, हरीश सुखीजा, विशाल इीनककप, रामकृष्ण कन्नौजिया, अमित साहनी, अनिल तनेजा, रमन अरोरा, कुक्कू शर्मा, गौरव राज बेहड़, राजेश कामरा, सौरभ राज बेहड़, विजय विरमानी, बंटी बाम्बा, कृतिका बाम्बा, आशीष मिड्ढा, राजकुमार कक्कड़, सचिन मुंजाल, कपिश सुखीजा, शिवम जग्गा, आशू सुखीजा, राजन राठौर सहित हजारों रामभक्त मौजूद रहे।

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