बिग ब्रेकिंग: (उत्तराखंड पंचायत चुनाव) : [उधम सिंह नगर ] गंगवार परिवार का दबदबा जारी, ‘पांचवीं बार’ जिला पंचायत सदस्य बने, जिला अध्यक्ष पांचवीं बार बनने के लिए रास्ता साफ, चंपावत को छोड़कर कांग्रेस की ‘दमदार’ वापसी, ‘कप प्लेट’ ‘चुनाव चिन्ह’प्रत्याशियों के लिए ‘लकी’ रहा! Ashok Gulati editor in chief एक्सक्लूसिव

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(उधम सिंह नगर नवनिर्वाचित पंचायत सदस्य)

udham Singh Nagar (उत्तराखंड पंचायत चुनाव) :गंगवार परिवार का दबदबा जारी, ‘पांचवीं बार’ जिला पंचायत सदस्य बने, जिला अध्यक्ष पांचवीं बार बनने के लिए रास्ता साफ, चंपावत को छोड़कर कांग्रेस की ‘दमदार’ वापसी, ‘कप प्लेट’ ‘चुनाव चिन्ह’प्रत्याशियों के लिए ‘लकी’ रहा! Ashok Gulati editor in chief एक्सक्लूसिव/उत्तराखंड में एक इतिहास और कायम हो गया गंगवार परिवार की बहू भाजपा नेता सुरेश गंगवार की पत्नी रेनू गंगवार दूसरी बार पंचायत सदस्य बनी, इससे पूर्व सुरेश गंगवार की माता जी दो बार, पिताजी ईश्वरी गंगवार एक बार, उनकी पत्नी अब लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य बनी है, l लगातार गंगवार परिवार जिला पंचायत अध्यक्ष उधम सिंह नगर पर काबिज है, पांचवी बार जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए कोई भी रुकावट नहीं दिख रही है, मुख्यमंत्री का जहां आशीर्वाद प्रदान है, वही नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य समर्थन मिल सकता है, मजेदार बात यह है कि कप प्लेट चुनाव पिछली बार भी उनको मिला था और इस बार भी का प्लेट ही था, नैनीताल जनपद में कप प्लेट चुनाव चिन्ह में कई प्रत्याशी जीत कर आए हैं, कप प्लेट चुनाव लकी माना जा रहा है, चंपावत जनपद को छोड़ दें, तो भाजपा की पंचायत चुनाव में हालत पतली हुई है, वहीं निर्दलीय एवं कांग्रेस की धमाकेदार वापसी कांग्रेसियों को संजीवनी की बूटी मिल गई है, प्रदेश के 12 जिलों में हुए पंचायत चुनाव के परिणाम के साथ ही एक बड़ी तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। इस बार ग्रामीण मतदाता सत्ता व भाजपा जनप्रतिनिधियों से ज्यादा खुश नही था। लिहाजा महत्वपूर्ण स्थानों में भाजपा के दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी है। कई स्थानों में विधायकों के खास लोग चारों खाने चित्त हो गये। दरअसल, उत्तराखंड पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं हुए हैं। हालांकि, तमाम राजनीतिक दलों ने समर्थित उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा था। इस लिहाज से दावा किया जा रहा है कि पंचायती राज व्यवस्था में कांग्रेस दमदार वापसी करती दिख रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी को कई अहम सीटों पर पीछे रहना पड़ा है। देहरादून की हाट सीट पर मधु चौहान व नैनीताल की पनियाली सीट से बेला टोलिया की सीट के अलाव नैनीताल, टिहरी, ओखलकांडा, बेतालघाट, धारी, चमोली की कई सीटों को भाजपा के दिग्गज भी नही बचा सके। उत्तराखंड में भाजपा के विधायकों को कई सीटों पर मुह की खानी पड़ी है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पंचायत चुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों ने ग्रामीण सरकार की सत्ता पर काबिज होकर निचले स्तर पर अपनी जड़ों को मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की। कांग्रेस की ओर से भी काफी प्रयास किए गए। दरअसल, पिछले दो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति काफी खराब रही है। भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी लगभग दो तिहाई बहुमत के साथ दूसरी बार सत्ता में वापसी की। पार्टी ने शहरी से लेकर ग्रामीण स्तर पर अपनी जड़ों को मजबूत किया है। हालांकि, उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 के परिणाम अलग संकेत देते दिख रहे हैं। इस बार भाजपा व कांग्रेस से.बागी हुए लोगों ने भी चुनाव जीता है, जो गांवों की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। 12 जिलों में 358 जिला पंचायत सदस्य, 2974 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 7499 प्रधान ग्राम पंचायत के पदों पर 24 और 28 जुलाई को हुई वोटिंग के परिणाम अलग संदेश दे रहे हैं। हालांकि अब दोनों दलो की ओर से जिला पंचायतों के अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुखों की कुर्सी के लिए जोड़ तोड़ तेज कर दी गई है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की सत्ता होने का फायदा वह उठा सकती है। कुल मिला कर इस बार इन चुनावों में ग्रामीण मतदाताओं ने कई स्थानों में भाजपा के विधायकों व सत्ता के खिलाफ मतदान किया। खास बात यह रही कि युवा मतदाता सत्ता के खिलाफ खड़े दिखे, यह भाजपा के लिए सुखद संकेत नही है। हालांकि अब भी गांवों की सरकार बनाने में भाजपा को पूरा भरोशा है। लेकिन नतीजों से कांग्रेस को भी संजीवनी मिलीं है। गांवों की सरकार बनाने में वह भी अंतिम समय तक कोई कोरकसर नही छोड़ेगी। बरहाल अब ब्लॉक प्रमुख एवं जिला पंचायत अध्यक्ष कुर्सी के लिए युद्ध स्तरीय संपर्क शुरू हो गया है, देखना यह होगा कि आने वाले समय में कौन प्रमुख व जिलाअध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होता है।

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