टनकपुर: [चंपावत] संविधान की चिंता छोड़ अपनी चिंता करे कांग्रेसः विकास शर्मा Ashok Gulati editor in chief/राजीव गुप्ता संवाददाता

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  • भाजपा प्रदेश मंत्री ने कांग्रेस के दुष्प्रचार को लेकर बोला हमला
  • संविधान की मूल भावनाओं को धरातल पर उतार रही भाजपा सरकार
  • कांग्रेस के शासन में हुई संविधान के साथ सबसे अधिक छेड़छाड़

टनकपुर। भाजपा प्रदेश मंत्री एवं चंपावत के जिला प्रभारी विकास शर्मा ने कांग्रेस की देहरादून में प्रस्तावित संविधान बचाओ रैली को लेकर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश मंत्री ने कांग्रेस को संविधान की चिंता छोड़ अपनी पार्टी की चिंता करने की नसीहत दी।

भाजपा प्रदेश मंत्री विकास शर्मा ने कहा कि कांग्रेस संविधान की बात करती है। लेकिन वर्ष 1951 में संविधान का पहला संशोधन करके अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने की कोशिश की नेहरू जी ने ही की थी। पिछले कुछ साल से कांग्रेस संविधान को लेकर जनता को बरगलाने की कोशिश कर रही है। लोकसभा चुनाव में जनता कांग्रेस के इस नेरेटिव का करारा जवाब दे चुकी है। संविधान संशोधन की बात करें तो कांग्रेस के ही शासन के दौरान सबसे अधिक संविधान से छेड़छाड़ की गई। जमाना चाहे नेहरू जी का हो, इंदिरा गांधी का हो, उनके जमाने में तो देश में आपातकाल भी लगाया गया। एक संविधान संशोधन, जिसे 39वां संविधान संशोधन कहते हैं, उसमें तो राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्पीकर अगर इनका चुनाव होता है और इस मामले में रिव्यू के लिए कोई कोर्ट जाता है तो उसे कोर्ट में जाने का भी अधिकार नहीं था। ये पूरी तरह से संविधान की भावना के िऽलाफ किया गया संशोधन था।

संविधान की आत्मा कहे जाने वाले प्रस्तावना तक को बदल देने वाले अब संविधान की बात कर रहे हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने वर्ष 1954 में वक्फ अधिनियम पारित कर अपने वोटबैंक को ऽुश करने का काम किया था। इसके अलावा 1961 में अनुच्छेद 66 और 71 में संशोधन कर उपराष्ट्रपति के निर्वाचन प्रक्रिया में बदलाव किए। कांग्रेस के राज में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में देश में आपातकाल लगा दिया और देश में लोगों के मौलिक अधिकारों को ऽत्म किया। प्रेस पर पाबंदी लगाई और विपक्ष के नेताओं को जेल में डाला। 1971 में अनुच्छेद 31 में संशोधन कर भारत में संपत्ति के मौलिक अधिकार को समाप्त कर इसे एक वैधानिक अधिकार बना दिया गया। इसके बाद 1975 में संविधान का 38वाँ संशोधन करके आपातकाल पर न्यायिक समीक्षा का रास्ता भी बंद कर दिया। सितंबर 1975 में इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाए रऽने के लिहाज से संविधान का 39वां संशोधन किया गया। सितंबर 1976 में 41वें संविधान संशोधन में प्रधानमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति के िऽलाफ पद छोड़ने के बाद भी कोई मामला दर्ज नहीं किया जाने का संशोधन किया गया। वर्ष 1977 में 42 वें संशोधन ने संविधान की मूल संरचना को ही बदल दिया। इंदिरा गांधी ने न सिर्फ निर्वाचन आयोग बल्कि न्यायपालिका को भी कमजोर करने के प्रयास किया।

जिला प्रभारी एवं रूद्रपुर के महापौर विकास शर्मा ने आगे कहा कि राजीव गांधी के कार्यकाल में भी शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलने के लिए 1985 में संविधान संशोधन किया गया। इसके अलावा 1988 में प्रेस की स्वतं=ता पर अंकुशल गाने के लिए मानहानि विरोधी कानून पेश किया हालाकि इसे भारी विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी कई संशोधन किये गये। इसमें सबसे महत्वपूर्ण वर्ष 2013 में वक्फ अधिनियम में संशोधन कर वक्फ बोर्डों को संपत्ति हड़पने के असीमित अधिकार दिये गये जिन्हें किसी भी अदालत को चुनौती नहीं दी जा सकती। आज मोदी सरकार इन असीमित अधिकारों को कम करने का प्रयास कर रही है तो इसीलिए कांग्रेस बेचैन हो गयी है।

भाजपा जिला प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान को समय समय पर अपने हिसाब से तोड़ने मरोड़ने की कोशिश तो की ही साथ ही संविधान और संवैधानिक पदों का अपमान भी किया। विपक्ष में रहकर कांग्रेस ने सकारात्मक राजनीति करने के बजाय समय समय पर राष्ट्रपति उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष पदों पर आसीन लोगों को भी अपमानित करने का काम किया है। देश की अस्मिता से जुड़े मामलों पर भी कांग्रेस ने हमेशा राजनैतिक रोटियां सेकने का काम किया है। धारा 370, सीएए, तीन तलाक, यूसीसी, राम मंदिर जैसे मुद्दों पर भी कांग्रेस हमेशा नकारात्मक और वोट बैंक की राजनीति करने से बाज नहीं आयी। कांग्रेस जैसे जैसे कमजोर हो रही है उसकी बौखलाहट भी बढ़ती जा रही है यही वजह है कि कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों में चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े करके अपनी हार का ठीकरा ईवीएम और चुनाव आयेाग पर थोपती आयी है।

विकास शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को आज संविधान बचाओ रैली निकालने के बजाय कांग्रेस बचाओ रैली निकालनी चाहिए। प्रदेश मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासन में 356 अनुच्छेद का उपयोग लगभग 90 बार किया। 50 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया। जवाहर लाल नेहरू ने अपने शासन काल के दौरान चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त करने के लिए 6 बार अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया। कांग्रेस के शासन में संविधान का इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है कि लोकतांत्रिक तौर पर चुने गये प्रधानमंत्री मननमोहन सिंह के कार्यकाल में सोनिया गांधाी को सुपर पीएम और बॉस माना जाता था।

भाजपा प्रदेश मंत्री ने कहा कि भाजपा पर संविधान को बदलने का आरोप लगाने वाले कांग्रेसियों को यह जान लेना चाहिए कि जनसंघ और भाजपा की स्थापना ही संविधान को लागू करने के लिए हुई थी। एक विधान एक निशान के नारे के साथ हमारे प्रेरणा पुरूष डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हुआ। आज भाजपा संविधान की धाराओं की मूल भावनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने का काम कर रही है और कांग्रेस के मंसूबों को जनता के सामने ला रही है। हमारे लिए संविधान केवल शब्दों धाराओं और अनुच्छेदों का संग्रह नहीं बल्कि एक धर्म ग्रंथ है। इस पर सभी भारतवासियों को गर्व है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने कभी भी देश में पूर्ण लोकतंत्र लागू नहीं होने दिया। आज कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसी लिए संविधान को लेकर जनता को बरगलाने की कोशिश की जा रही है, जनता कांग्रेस पहले भी कई बार सबक सिखा चुकी है। आगे भी जनता कांग्रेस की नौटंकी का करारा जवाब देगी।

प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।

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