ब्रेकिंग चंपावत: अल्मोड़ा कोसी नदी की तर्ज पर चंपावत की गंडक नदी का भी होगा पुनर्जनन कार्य,शीघ्र ही डीपीआर तैयार होगी! ✍️ अशोक गुलाटी editor-in-chief/ 💥महेंद्र सिंह बिष्ट की रिपोर्ट

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✔️क्षेत्र में 15 रिचार्ज जोन चिन्हित किए गए हैं, गंडक नदी के उद्‌गम क्षेत्र में प्रत्येक जोन हेतु एक नोडल अधिकारी नामित होगा जिनके नेतृत्व में विभिन्न जल संवर्धन के कार्य होंगे

✔️गंडक नदी के पुनर्जनन हेतु क्षेत्र में पौधारोषण कार्यों के अतिरिक्त जल संवर्धन,जल संचय हेतु चाल-खाल, खंतियां,चेकडैम के निर्माण के अलावा जल स्रोतों को बढ़ाए जाने हेतु अनेक कार्य किए जायेंगे

✔️जिला स्तर से तैयार प्रस्ताव को जिलास्तरीय कमेटी के माध्यम से स्वीकृत कर राज्य स्तरीय कमेटी को प्रस्ताव भेजा जाएगा। दो सप्ताह के भीतर डीपीआर तैयार होगी

चंपावत: जनपद‌ चंपावत को एक आदर्श जनपद बनाए जाने हेतु इसरो के साथ ही देश के महत्वपू‌र्ण वैज्ञानिक संस्थानों के सहयोग से अनेक परियोजनाओं पर कार्य किए जाने के साथ ही चंपावत हेतु एक डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है,जिसमें सभी विभागों का डाटाबेस व जानकारी होंगी। गुड गवर्नेंस पर किया जा रहा यह कार्य सभी हिमालयी राज्यों के लिए प्रेरणा देगा। प्रो० दुर्गेश पंत

वर्ष 2030 तक चंपावत मॉडल जिले के जो भी लक्ष्य निर्धारित हैं वह शत प्रतिशत पूर्ण करेंगे– जिलाधिकारी नवनीत पाण्डे

किसी भी योजना के प्रस्ताव तैयार करने में जीआईएस डेटाबेस का महत्वपूर्ण लाभ मिलता है–प्रो. जे. एस. रावत

 आदर्श चंपावत हेतु नोडल एजेंसी ’ *उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्’* के तत्वावधान में जिला कार्यालय सभागार चंपावत में जीआईएस डेटाबेस तैयार करने एवं चंपावत की गंडक नदी पुर्नजनन को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। 

कार्यशाला का सुभारम्भ वर्चुवल माध्यम से यूकोस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. पंत ने कहा कि आगामी 2030 तक जनपद चम्पावत को एक मॉडल जिले के रूप में विकसित करने हेतु IIRS के साथ मिलकर यूकॉस्ट एक डैशबोर्ड तैयार कर रहा है। उन्हें कहा कि चंपावत जिले के विकास व इसे मॉडल जिला बनाए जाने हेतु देश के विभिन्न संस्थानों का सहयोग लेकर मॉडल एक तैयार कर विभागवार लक्ष्य निर्धारित कर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग का जिले में डेटाबेस तैयार करने में तेजी से कार्य गतिमान है।
कार्यशाला में उपस्थित जिलाधिकारी नवनीत पाण्डे ने कहा कि अल्मोड़ा कोसी नदी की तर्ज पर चंपावत की गंडक नदी का पुर्नजनन का कार्य भी किया जा रहा है, इस हेतु एक कार्य योजना तैयार की जा रही है। जिसमें गण्डक नदी के रिचार्ज क्षेत्र कुल 15 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जिसमें बनलेख मुडियानी, खर्ककार्की, चौड़ा खर्कखेत, नाद बोरा, ढकना बडोला, छानिया, तल्लीमादली, पुनेठी, चौड़ा दुमखोरी, बरदोली, राकरी फुलारा, चौकुनी बोरा, छीरापानी व छीरापानी वनलेख हैं। इनमें प्रत्येक क्षेत्र हेतु एक नोडल अधिकारी तैयार कर रिचार्ज हेतु एक कार्य योजना तैयार कर नदी पुर्नजनन के कार्य कराये जायेंगे। इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के प्रत्येक विभाग के अन्तर्गत सभी परिसम्पत्तियाँ व विभाग से संबंधित जामकारी जियो मैपिंग कर डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे गुड गवर्नेंस में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।

कार्यशाला में यूकॉस्ट से प्रतिनिधि तौर पर उपस्थित कोसी नदी पुर्नजनन के विशेषज्ञ प्रो. जे.एस. रावत द्वारा जियो डेटाबेस तैयार किए जाने हेतु वर्ष 2018 तक चंपावत जिले में विभागवार कराये गए कार्यों आदि के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जिस प्रकार तकनीकी लगातार आगे बढ़ रही है, हमें उसी के साथ आगे बढ़ना होगा
इस हेतु प्रत्येक विभाग को अपना एक डेटाबेस तैयार करना होगा, जिसमें सभी आंकड़े (जिओ मैपिंग) दूरस्त करने होंगे।
उन्होंने कहा कि आज हम डेटा एकत्रित कर उसका बेहतर लाभ ले सकते हैं, कम से कम समय में बेहतर प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं व जानकारी एकत्रित कर सकते हैं और कहा कि प्रत्येक विभाग में जिओ ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई जा रही है, इस हेतु प्रत्येक विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा। प्रत्येक विभाग में जीआईएस सेल बनेगा। प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह विभाग के डेटा का समय–समय पर परीक्षण कर उसे अपडेट रखेगा। उन्होंने कहा कि चंपावत जिला प्रदेश का पहला जिला बनेगा जहाँ से डेटा परीक्षण कर सत्यापित होकर प्राप्त होंगे
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग का ऐसा डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिसमें एक क्लिक करने पर सभी जानकारियाँ प्राप्त होंगी। उन्होंने कहा कि कार्यशैली में जीआईएस को पहले आदत में लाओ तथा फिर उसे अपनी कार्य संस्कृति में लायें और कहा कि सभी विभागों को अपनी परिसंपत्तियों की पॉलीगन बनाना आवश्कीय है।
इस दौरान प्रो० रावत द्वारा पीपीटी के माध्यम से कोसी नदी पुनर्जनन कार्य के अपने अनुभव साझा करते हुए गंडक नदी पुर्नजनन कार्य के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
कार्यशाला में जिला प्रभारी जीआईएस केन्द्र नीरज फर्स्वाण द्वारा जनपद में विभिन्न विभागों के अंतर्गत तैयार जीआईएस डेटाबेस के बारे में जानकारी दी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, डीडीओ दिनेश दिगारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थिति थे।

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