breaking Haldwani: उच्च न्यायालय के स्थानांतरण को लेकर पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी ‘भगतदा’ ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को लिखी चिट्ठी @अशोक गुलाटी editor-in-chief

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💥उच्च न्यायालय के स्थानांतरण को लेकर पूर्व सीएम कोश्यारी ‘भगतदा’ ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को लिखी चिट्ठी @अशोक गुलाटी editor-in-chief..

महाराष्ट्र के पूर्व गवर्नर एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी भगतदा ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को चिट्ठी लिखी है । चिट्ठी में भगतदा ने बिंदुवार अपनी राय रख सीएम धामी को अवगत कराया है। शासन की ओर से केन्द्र सरकार या सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से शीघ्र समस्या का समाधान निकाला जाय। उन्होंने

कहा हाल में मा० उच्च न्यायालय नैनीताल द्वारा उच्च न्यायालय को नैनीताल से अन्यत्र स्थानांतरित करने के लिए नये स्थान ढूंढने के निर्देश दिये गये है, इस सम्बन्ध में मेरा आपसे अनुरोध है कि कृपया निम्न बिन्दुओं पर प्राथमिकता से विचार करने का कष्ट करें।

बिन्दु संख्या-01, उत्तराखण्ड (उत्तरांचल) राज्य बनाते समय विस्तृत विचार विमर्श के बाद देहरादून को तात्कालिक राजधानी एवं नैनीताल में उच्च न्यायालय बनाने का निर्णय लिया गया।

बिन्दु संख्या-02, नैनीताल में अंग्रेजों के समय से ही राजभवन, सचिवालय आदि बनाये गये हैं, यह उत्तर-प्रदेश की गर्मियों की राजधानी के रूप में प्रयुक्त होता रहा है, किन्तु नये राज्य में नैनीताल को राजधानी बनाने से मंत्रियो, विशिष्ट जनों की अधिकता से स्थानीय पर्यटन व जनजीवन को बाधा पहुंचने की सम्भावना को देखते हुए यहां क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर हाईकोर्ट की स्थापना की गई।

बिन्दु संख्या-03, मैं कानून का विद्यार्थी नही हूँ किन्तु लम्बे समय तक संसद व विधान मण्डल के सदस्य रहने के कारण मेरा कहना है कि न्यायालय का सम्मान रखते हुए भी राज्य की कौन संस्था, विभाग कहां रहे इसका निर्णय संसद या विधान मण्डल ही करते आये है। मा० न्यायालय इस सम्बन्ध में निर्णय लेने लगेगें तो पी.आई.एल. कर्ता कल को किसी भी विभाग जिला, तहसील आदि की मांग को लेकर न्यायालय पहुँच जायेगे व इससें संविधान द्वारा केन्द्र या प्रदेश सरकारों को दिये गये अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप की सम्भावना बढ़ जायेगी।

बिन्दु संख्या-04, जहां तक नैनीताल हाईकोट के अन्यत्र स्थानांतरित करने का प्रश्न है मेरी जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार इससे पहले से ही सहमत है। चिट्ठी के बिस्तर से उन्होंने ‌‌

संख्या-05, जैसा कि मा० उच्च न्यायालय ने अपने निर्देश में स्वयं कहा है कि (निर्देश संख्या 13 एवं 14 D) मा० उच्च न्यायालय की फुल बैंच ने गौलापार हल्द्वानी में कोर्ट को स्थापित करने की प्रक्रिया पर सहमति दी थी।

बिन्दु संख्या-06, शासन / प्रशासन द्वारा इस प्रक्रिया को आगे गढाते हुए गौलापर में लगभग

26 बीघा जमीन का चयन कर बन विभाग से अनापत्ति हेतु प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है, तथा केन्द्रीय वन एव पर्यावरण विभाग से इस पर विचार कर 26 बीघे जमीन को अधिक बताते हुए इसे कुछ कम करने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देशित किया गया है। इसमें क्षतिपूर्ति के लिए वन विभाग को अन्यत्र वन लगाने हेतु जमीन का भी चयन कर लिया गया है ऐसे में अब अन्यत्र वैकल्पिक स्थान ढूंढने हेतु दिये गये निर्देश से क्षेत्र में असन्तोष फैलने की सम्भावना से नकारा नहीं जा सकता है।

बिन्दु संख्या-07, वैसे भी उक्त प्रस्तावित स्थान रौखड़ के रूप में अभिलेखों में दर्शाया गया है।

बिन्दु संख्या-08, उक्त स्थान में स्थित अधिकांश पेड़ केवल 4 से 6 इंच मोटाइ के ही हैं।

बिन्दु संख्या-09, मा० न्यायालय से अपने आदेश में स्वयं ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि अधिवक्ताओं को virtuality (आभासी) या आन लाईन बहस करने का अभ्यास डालना चाहिए (आदेश क्रमांक-12)।

बिन्दु संख्या-10, मा० न्यायालय ने नैनीताल में आसपास चिकित्सा आदि की उचित व्यवस्था नही होने का जिक्र किया गया है। गौलापार हाईकोर्ट बन जाने से हल्द्वानी में सभी प्रकार की सरकारी व नीजी अस्पतालों के माध्यम से चिकित्सा की उचित सुविधा उपलब्ध हो जायेगी। यहां से हवाई अड्‌डा भी NH बन जाने से 20 या 25 मिनट पंतनगर पहुंचा जा सकता है।

बिन्दु संख्या-11, मैं अत्यन्त विनम्रता व न्यायालय का पूर्ण सम्मान करते हुए आपसे अनुरोध करता हूँ कि कृपया उच्च न्यायालय के लिए जनमत संग्रह जैसी प्रथा से बचा लाय। इससें भविष्य में इसका दुरूपयोग हो सकता है। मुख्यमंत्री‌ से आग्रह किया है कि इस सम्बन्ध में शासन की ओर से केन्द्र सरकार या सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से शी शीघ्र समस्या का समाधान निकाला जाय।

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