बिग ब्रेकिंग; नैनीताल उच्च न्यायालय ने नगर पालिका परिषद नैनीताल अधिशासी अधिकारी को निलंबित कर दिया; पालिकाध्यक्ष के समस्त वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए@

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हाइकोर्ट के पूर्व जस्टिस इरशाद हुसैन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर मामले की जांच करने के भी निर्देश ;नैनीताल हाई कोर्ट ने डीएसए मैदान में बिना टेंडर आमंत्रित किए झूले लगाने का काम कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। प्रकरण में नगर पालिका परिषद नैनीताल के अधिशासी अधिकारी (ईओ) आलोक उनियाल को निलंबित कर दिया। साथ ही नगर पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी की वित्तीय शक्तियों को सीज कर दिया गया है। इसके साथ ही ईओ को आदेश दिया है कि वह प्रभावित ठेकेदार को व्यक्तिगत रूप से 50 हजार रुपये का हर्जाना देंगे। प्रकरण में कोर्ट ने मुख्य सचिव उत्तराखंड को आदेश दिया कि वह एक माह के भीतर कार्य की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। प्रकरण की जांच सेवानिवृत्त न्यायधीश से कराने के आदेश दिए दिए हैं!

नैनीताल। अशोक गुलाटी editor-in-chief उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए नैनीताल नगर पालिका में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता संबंधी जनहित याचिका को सुनते हुए बड़ा निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने पालिकाध्यक्ष के समस्त वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं, और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने अधिशासी अधिकारी आलोक उनियाल को निलंबित कर दिया है। पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी की प्रशासनिक व वित्तीय शक्तियां सीज कर दी हैं। उत्तराखण्ड हाईकोट के इस अहम फैसले से वीआईपी शहर में पालिका के कार्यों को लेकर पूर्व में लगाये गये आरोपों पर मुहर भी लग गई है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीयूष गर्ग के अनुसार न्यायालय में पिछले दिनों काशीपुर निवासी ठेकेदार कृष्णपाल ने तीन रिट याचिका दाखिल कर न्यायालय से कहा था कि उनकी निविदाओं को नन्दा देवी और दूर्गा पूजा महोत्सव से इरादतन बाहर किया गया। इसमें पालिका ने गलत नियत के साथ रमेश सिंह सजवाण को नियमों की अनदेखी कर ठेका दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्वत: संज्ञान पीआईएल के रूप में ले लिया था। पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पालिका में मनमानी और वित्तीय अनियमितता को देखते हुए दोनों जिम्मेदारों पर तल्ख टिप्पणी भी की थी। 10 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए नगर पालिका नैनीताल को उसी दिन झूले हटाने का आदेश दिया था। साथ ही इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा था, लेकिन जब झूलों को नहीं हटाया गया तो कोर्ट ने पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी व अधिशासी अधिकारी को तलब कर लिया। उन्हें नियमविरुद्ध झूले संचालित करने पर कड़ी फटकार लगाई और कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया था। मंगलवार को कोर्ट ने इस मामले में अहम आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ने मामले में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति इरशाद हुसैन की कमेटी से जांच कराने को आदेशित किया है।
आज मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने नैनीताल नगर पालिका में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता को देखते हुए जनहित याचिका में ईओ आलोक उनियाल को निलंबित कर दिया है। खंडपीठ ने पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को सीज करते हुए सरकार से नगर पालिका के अकाउंटों की जांच करने को कहा है। हाईकोर्ट ने हाइकोर्ट के पूर्व जस्टिस इरशाद हुसैन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर मामले की जांच करने के भी निर्देश जारी किए हैं। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट के आदेशों के बाद पालिका में हड़कंप मचा हुआ है।

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