ब्रेकिंग चंपावत: श्री श्री 1008 हिमालयन पीठाधीश्वर, हिमालयन योगी स्वामी वीरेंद्रानंद महाराज जी महामंडलेश्वर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा होली का पर्व मनाने श्री कैलाश मानसरोवर मार्ग पीतांबरा (बगलामुखी धाम) – हिमालयन पीठ तवाघाट पहुंचे!👉 भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्वामी जी का स्वागत किया!! अशोक गुलाटी editor-in-chief की रिपोर्ट

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चंपावत (अशोक गुलाटी editor-in-chief की रिपोर्ट): श्री महावतार बाबाजी की गुफा द्वाराहाट से श्री श्री 1008 हिमालयन पीठाधीश्वर, हिमालयन योगी स्वामी वीरेंद्रानंद महाराज जी महामंडलेश्वर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा जी
होली का पर्व मनाने श्री कैलाश मानसरोवर मार्ग पीतांबरा (बगलामुखी धाम) – हिमालयन पीठ तवाघाट पहुंचे गौरतलब है कि कि अनादि काल से पूरे भारतवर्ष के यात्री इसी संगम से होकर कैलाश मानसरोवर/ओम पर्वत/आदि कैलाश पर्वत की यात्रा करते थे और यह हिमालयन पीठ बेस कैंप रहा है। तत्कालीन अस्कोट पाल वंश के राजा श्री अभय पाल व श्री महेंद्र पाल ने वड्डा पिथौरागढ़ से लेकर नारायण नगर, जौलजीबी हंसेश्वर ,खेला तवाघाट , गुंजी, गर्ब्यगं, नाबीडांग, यात्राओं के पड़ाव बनाए। यह भी उल्लेख है कि जूना अखाड़े में संन्यास लेने के बाद प्रत्येक संन्यासी को ओम पर्वत, आदि कैलाश, कैलाश मानसरोवर, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ की यात्रा करना अनिवार्य था।
स्मरणीय है कि इस यात्रा में सबसे कठिन दुर्गम व श्मशानो के मध्य बसा हुआ धौलीगंगा और काली गंगा के तट पर तवाघाट रहा है जो ग्रामसभा खेत, छिड़कीला, गर्गुवा, घशीला, स्यांकुरी, जुम्मा, राथी, जयकोट, पांगला, नेपाल राष्ट्र के गांव छूती, बसेड़ी, तिर्गम, स्यांकु, सीना व सुनसेरा के श्मशान घाटों के मध्य यह तवाघाट कस्बा है। आजादी से पहले हर यात्री इसी धौली और काली गंगा के बीच तार व रस्सी लगाकर के अगले पड़ाव में पहुंचते थे आज इस स्थान पर विशाल मां पीतांबरा मठ (बगलामुखी /हिमालयन पीठ ) का निर्माण हो चुका है। और भारत सरकार ने इसी स्थान पर भव्य पुल का निर्माण कर इतिहास रच दिया है। आप सभी लोग इस पीठ में सादर आमंत्रित हैं। मां बगलामुखी का आशीर्वाद प्राप्त करें।
इसी स्थान पर स्वामी वीरेंद्रानंद जी ने मां बगलामुखी का आरती कर होली की शुभकामनाएं प्रेषित की। इससे पूर्व स्वामी जी के पहुंचने पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत कियाl

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