बिग ब्रेकिंग उधम सिंह नगर:😲 पीटी टीचर संजीव कुमार पांडे का आयुर्वेदिक ‌विश्वविद्यालय देहरादून में ‘सहायक उप कुलसचिव पर नियुक्ति प्रकरण’ ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ हैरान करने वाला हाईटेक खेला! 👁️देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल का हुआ खबर का धमाका@👉गवर्नर हाउस पहुंचा मामला@जांच के हुए आदेश@😲😲 कुलपति ने एडिटर इन चीफ से कहां नियुक्ति मैं हुई ‘सरेआम धांधली’ @🙄रजिस्टर ने बिठाई 3 सदस्य ‌प्रोफेसर की जांच कमेटी ! ✔️ सीएम साहब आपके विभाग मैं आखिर क्यों बचाया जा रहा है इस पी .टी टीचर को? 🌘 हैरतअंगेज हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल खोलती सनसनीखेज (पार्ट-३) अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल की Excluive report:-

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आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून की पूर्व बहुत चर्चित रजिस्टर ने ऐसा खेला खेला दांतो तले उंगली आप दबा लेंगे एक जूनियर पीटी टीचर को कैसे उपकुल सचिव पद की नियुक्ति दिला दी जबकि इस पद पर केवल प्रशासनिक अधिकारी की ही नियुक्ति हो सकती है। भ्रष्टाचार एक प्रत्यक्ष प्रमाण सहित आपको सनसनी के (पार्ट 3 )प्रस्तुत कर रहे हैं जबकि यह विभाग युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास है। जबकि सीएम साहब भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए रात दिन एक लगे हुए हैं; वही अधिकारी कैसे सरकार की खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है? एक प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की जगह एक जूनियर पीटी टीचर की नियुक्ति कर दी। हमारी खबर चलने के बाद शासन प्रशासन हरकत में आया है अब गवर्नर के यहां से जांच के आदेश हुए हैं और हड़कंप मच गया है तीन सदस्यीय जांच समिति बना दी गई है जो 1 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करेंगे।

उधम सिंह नगर (अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ)। स्थानीय मुख्यालय रुद्रपुर में जूनियर स्कूल में पीटी टीचर का आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय कॉलेज में उप कुलसचिव की नियुक्ति का प्रकरण तूल पकड़ता जा रहा है। गौरतलब है कि इस मामले को देवभूमि न्यूज़ पोर्टल चैनल ने प्रमुखता से उठाया था। मामला गवर्नर हाउस पहुंच चुका है राजपाल के अनु सचिव ने शासन को जांच के आदेश दिए हैं शासन ने इस मामले को गंभीरता से देखते हुए आयुर्वेदिक कॉलेज के रजिस्ट्रार को जांच के आदेश दिए हैं रजिस्ट्रार dr राजेशAdana 3 सदस्य प्रोफेसर की जांच कमेटी बनाई है सूत्रों के मुताबिक जांच कमेटी में प्रोफेसर अनूप कुमार प्रोफ़ेसर पंकज शर्मा प्रोफेसर अमित जैन वित्तीय अधिकारी को नियुक्त किया है जिसकी रिपोर्ट 1 सप्ताह के भीतर देनी है। जांच के आदेश देने के बाद पीटी टीचर को बचा रहे तथाकथित उनके संरक्षक वालों में हड़कंप मच गया है। आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रोफेसर कुलपति डॉ सुनील कुमार जोशी ने देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल एडिटर इन चीफ अशोक गुलाटी के एक सवाल के जवाब में स्वीकार किया कि किया पीटी टीचर की उप कुलसचिव की नियुक्ति अवैधानिक है। जबकि इस पद पर प्रशासनिक अधिकारी की ही नियुक्ति होनी चाहिए थी। गौरतलब है कि( विगत पार्ट 2 )में हमने आपको अवगत करवाया था कि

उत्तराखंड राज बनने के लिए सैकड़ों युवाओं माताओं बहनों ने कुर्बानी दी थी कि छोटा राज्य बनेगा राज्य में खुशहाली आएगी और युवाओं को रोजगार मिलेगा और उन्हें विभिन्न राज्यों में रोटी रोजी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा परंतु राज बनने के बाद बिल्कुल उल्टा हो गया है कुछ भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारियों ने ऐसा खेला खेला है कि आप सुनकर दांतों तले उंगली दबा लेंगे। जिस तरह से राज्य में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है; शहीद हुए आंदोलनकारियों की आत्माएं निसंदेह दुखी होती होंगी? इस तरह का भ्रष्टाचार देखकर कहती हो कि क्या इसीलिए हमने इस राज्य की स्थापना की थी? ऐसे ही सनसनीखेज भ्रष्टाचार आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून का बताया था कि एक रुद्रपुर में एक जूनियर स्कूल में पीटी टीचर ने आयुर्वेदिक कॉलेज की रजिस्टर जो अभी हाल में ही ढाई साल जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट जमानत पर छूटे हैं और उसके खिलाफ अभी भी बिजनेस एवं उच्च स्तरीय जांच चल रही है पीटी टीचर नेउनके साथ सांठगांठ कर इस तरह का खेला खेला कि वह कुछ ही सालों में आईएएस के वेतनमान के समान पहुंच गया हैरतअंगेज बात यह थी कि विभाग के कुलपति ने इस नियुक्ति पर घोर आपत्ति की थी परंतु इस सभी को दरकिनार करते हुए सचिव ने इनकी प्रमोशन की नियुक्ति पत्र हस्ताक्षर कर दिए। यह हैरतअंगेज कारनामा उत्तराखंड सरकार का है; जबकि यह विभाग स्वयं युवा तेजतर्रार इमानदार भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लेकर पुष्कर सिंह धामी रात दिन एक करें हुए हैं। वही नौकरशाह किस कदर खेला खेल रहे हैं यह चौंकाने वाला मामला हम आपको बताने जा रहे हैं; आप दांतो तले उंगली दबा लेंगे। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून की स्थापना 2010 में हुई थी; इसके लिए सहायक कुलसचिव की आवश्यकता थी; जिसको शिक्षा विभाग ने लिए उधम सिंह नगर के मुख्यालय रुद्रपुर में पीटी टीचर स्थानीय गजरौला मैं कार्यरत संजीव कुमार पांडे को 1 साल के लिए diptation में सहायक कुल सचिव के पद पर भेजा गया। अत्यंत चतुर चाणक्य संजीव कुमार पांडे ने विश्वविद्यालय में जाते ही कुछ सालों में पूर्व निलंबित रजिस्टर मृत्युंजय कुमार मिश्रा से मिलकर ऐसा खेला खेला कि सभी नियमों को ताक में रखकर 2016 में संजीव कुमार पांडे को सहायक कुलसचिव सचिव स्थाई बना दिया। मजेदार बात यह थी कि संबंधित शिक्षा विभाग कुंभकरण नींद सोता रहा; जब कि वह 1 साल के लिए श्री पांडे diptation में गया था; इस दौरान 6 साल तक विभाग ने सुध नहीं ली इस पर पांडे और मनमाने तौर पर उतर गया। विश्वविद्यालय में श्री पांडे का इस कदर दबदबा हो गया उससे कर्मचारी अधिकारी भी डरने लगे; क्योंकि भ्रष्ट निलंबित रजिस्टर का आंखों का तारा श्री पांडे बन चुका था वह हर मनमाने काम करने शुरू कर दिए थे। स्मरणीय है कि सहायक कुलसचिव पद पर सीधी शासन द्वारा विज्ञापन निकालकर भर्ती निकाली जाती है जिसमें केवल आयुर्वेदिक पीएचडी डॉक्टर ही इस पद के लिए योग होते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि श्री पांडे पीटी टीचर हैं। जबकि इसका मूल विभाग स्कूल शिक्षा विभाग है । जबकि यह सामूहिक ग कि श्रेणी में आते हैं; श्री पांडे को सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए राजपत्रित अधिकारी बना दिया गया। इधर दूसरी हो रुद्रपुर के जागरूक नागरिक सीपी गंगवार ने मुख्य सचिव को एक शिकायती पत्र एफिडेविट के साथ प्रेषित किया था और इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। प्रमुख सचिव ने इस मामले को गंभीरता से देखते हुए आयुष विभाग को जांच के आदेश दिए थे इधरश्री पांडे का इस कदर दबदबा था कि जांच को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हमने आपको( पार्ट वन ) में बताया था। इस नियुक्ति के खिलाफ देश के विख्यात मरम के विशेषज्ञ चिकित्सक प्रोफेसर डॉक्टर कुलपति सुनील कुमार जोशी ने पत्रांक 137 ; 21 -4 2022 को सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा अनुभाग उत्तराखंड शासन उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर श्री पांडे की नियुक्ति पर आपत्ति की थी; परंतु इसके बाद भी शासन ने इसको गंभीरता से नहीं लिया; और इनके पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। गौर करने की बात यह है कि यदि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय समाचार पत्रों में रिक्त पद के लिए प्रकाशित करते तो हजारों पीएचडी करे हुए आयुर्वेदिक डॉक्टर बेरोजगार बैठे हुए हैं जबकि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की ही नियुक्ति हो सकती हैजिस पद पर जूनियर स्कूल के पीटी टीचर की लगातार प्रमोशन होता रहा यह नियमों का खुलेआम उल्लंघन के साथ-साथ भ्रष्टाचार का खुला नंगा नाच है। इस पद पर केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की नियुक्त हो सकते हैं। गौर करने की बात यह है कि यदि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय समाचार पत्रों में रिक्त पद के लिए प्रकाशित करते तो हजारों पीएचडी करे हुए आयुर्वेदिक डॉक्टर बेरोजगार बैठे हुए हैं जबकि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की ही नियुक्ति हो सकती है
। हमने लगातार इस भ्रष्टाचार को प्रमुखता से प्रकाशित करते रहे इसका प्रमाण यह हुआ कि गवर्नर हाउस तक इसकी गूंज पहुंच गई और गवर्नर साहब ने जांच के आदेश दे दिए राजपाल के अनुसूचित ने शासन को जांच के आदेश दिए हैं शासन ने भी इसको गंभीरता से लेते हुए रजिस्ट्रार को जांच के आदेश पारित किए रजिस्ट्रार ने 3 सीनियर प्रोफ़ेसर सदस्यों की नियुक्ति की है जिसकी रिपोर्ट 1 सप्ताह में देनी है और शासन को प्रेषित कर दी जाएगी ।सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट पीटी टीचर को बचाने वाले उनके उनके आका में हड़कंप मच गया है जांच के बाद उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। एक ….

एक वरिष्ठ अफसर ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस पद पर प्रशासनिक नियुक्ति होनी चाहिए थी परंतु और भ्रष्ट निलंबित रजिस्टर जो हाल में ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर छूटा है उसने भ्रष्टाचार का इस तरह खेला खेला की एक जूनियर पीटी टीचर को प्रशासनिक पद पर बैठा दिया और इसमें बहुत मोटा खेला हुआ था। आपको अगले अंक में हम बताएंगे कैसे नियुक्ति पत्र में अधिकारी ने अपने को कैसे बचाया था? अभी तो खेला बाकी है( अगले चौथे अंक )में सनसनीखेज और खुलासा करेंगे? जारी…..

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