बिग ब्रेकिंग: रुद्रपुर (उधम सिंह नगर) : पीटी टीचर का “हाईटेक खेला”!😲 आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून मैं नियुक्ति से पहले हो गया था खेला ?😶 समाचार पत्रों में पद के लिए विज्ञापन नहीं दिया गया! 👉’गुपचुप तरीके’ से कर दी गई नियुक्ति@ जबकि आयुर्वेदिक डॉक्टर ही नियुक्त होने चाहिए था@👉 नियुक्त कर दिया रुद्रपुर में कार्यरत एक जूनियर स्कूल का पीटी टीचर@😲😲 कुलपति ने नियुक्ति पर की थी आपत्ति!!! 👁️भ्रष्टाचार की पोल खोलती सनसनीखेज+ (पार्ट- 2) अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ देव भूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल की Exclusive report:-

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उधम सिंह नगर (अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ)। उत्तराखंड राज बनने के लिए सैकड़ों युवाओं माताओं बहनों ने कुर्बानी दी थी कि छोटा राज्य बनेगा राज्य में खुशहाली आएगी और युवाओं को रोजगार मिलेगा और उन्हें विभिन्न राज्यों में रोटी रोजी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा परंतु राज बनने के बाद बिल्कुल उल्टा हो गया है कुछ भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारियों ने ऐसा खेला खेला है कि आप सुनकर दांतों तले उंगली दबा लेंगे। जिस तरह से राज्य में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है; शहीद हुए आंदोलनकारियों की आत्माएं निसंदेह दुखी होती होंगी? इस तरह का भ्रष्टाचार देखकर कहती हो कि क्या इसीलिए हमने इस राज्य की स्थापना की थी? ऐसे ही सनसनीखेज भ्रष्टाचार आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून का बताने जा रहे हैं। गौरतलब है कि हमने आपको पिछले (पार्ट वन) में बताया था कि मां-बाप का एक सपना होता है कि उनका बेटा बड़ा होकर आईपीएस इंजीनियर और बड़े पदों पर बने इसके लिए वह सब कुछ निछावर कर देते हैं हर युवाओं का भी सपना होता है बड़ा होकर आईएएस आईपीएस बने और देश और मां बाप का नाम रोशन करूं। इसके लिए रात दिन तैयारी करते हैं और कंपटीशन में बैठते हैं लाखों युवा पेपर देते हैं उसमें कुछ भी युवा पास हो पाते हैं। परंतु यहां तो सब उल्टा पुल्टा हो गया ना पढ़ाई ना कंपटीशन एक रुद्रपुर में एक जूनियर स्कूल में पीटी टीचर ने आयुर्वेदिक कॉलेज की रजिस्टर जो अभी हाल में ही ढाई साल जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट जमानत पर छूटे हैं और उसके खिलाफ अभी भी बिजनेस एवं उच्च स्तरीय जांच चल रही है पीटी टीचर नेउनके साथ सांठगांठ कर इस तरह का खेला खेला कि वह कुछ ही सालों में आईएएस के वेतनमान के समान पहुंच गया हैरतअंगेज बात यह थी कि विभाग के कुलपति ने इस नियुक्ति पर घोर आपत्ति की थी परंतु इस सभी को दरकिनार करते हुए सचिव ने इनकी प्रमोशन की नियुक्ति पत्र हस्ताक्षर कर दिए। यह हैरतअंगेज कारनामा उत्तराखंड सरकार का है; जबकि यह विभाग स्वयं युवा तेजतर्रार इमानदार भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने का संकल्प लेकर पुष्कर सिंह धामी रात दिन एक करें हुए हैं। वही नौकरशाह किस कदर खेला खेल रहे हैं यह चौंकाने वाला मामला हम आपको बताने जा रहे हैं; आप दांतो तले उंगली दबा लेंगे। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय देहरादून की स्थापना 2010 में हुई थी; इसके लिए सहायक कुलसचिव की आवश्यकता थी; जिसको शिक्षा विभाग ने लिए उधम सिंह नगर के मुख्यालय रुद्रपुर में पीटी टीचर स्थानीय गजरौला मैं कार्यरत संजीव कुमार पांडे को 1 साल के लिए diptation में सहायक कुल सचिव के पद पर भेजा गया। अत्यंत चतुर चाणक्य संजीव कुमार पांडे ने विश्वविद्यालय में जाते ही कुछ सालों में पूर्व निलंबित रजिस्टर मृत्युंजय कुमार मिश्रा से मिलकर ऐसा खेला खेला कि सभी नियमों को ताक में रखकर 2016 में संजीव कुमार पांडे को सहायक कुलसचिव सचिव स्थाई बना दिया। मजेदार बात यह थी कि संबंधित शिक्षा विभाग कुंभकरण नींद सोता रहा; जब कि वह 1 साल के लिए श्री पांडे diptation में गया था; इस दौरान 6 साल तक विभाग ने सुध नहीं ली इस पर पांडे और मनमाने तौर पर उतर गया। विश्वविद्यालय में श्री पांडे का इस कदर दबदबा हो गया उससे कर्मचारी अधिकारी भी डरने लगे; क्योंकि भ्रष्ट निलंबित रजिस्टर का आंखों का तारा श्री पांडे बन चुका था वह हर मनमाने काम करने शुरू कर दिए थे। स्मरणीय है कि सहायक कुलसचिव पद पर सीधी शासन द्वारा विज्ञापन निकालकर भर्ती निकाली जाती है जिसमें केवल आयुर्वेदिक पीएचडी डॉक्टर ही इस पद के लिए योग होते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि श्री पांडे पीटी टीचर हैं। जबकि इसका मूल विभाग स्कूल शिक्षा विभाग है । जबकि यह सामूहिक ग कि श्रेणी में आते हैं; श्री पांडे को सभी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए राजपत्रित अधिकारी बना दिया गया। इधर दूसरी हो रुद्रपुर के जागरूक नागरिक सीपी गंगवार ने मुख्य सचिव को एक शिकायती पत्र एफिडेविट के साथ प्रेषित किया था और इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी। प्रमुख सचिव ने इस मामले को गंभीरता से देखते हुए आयुष विभाग को जांच के आदेश दिए थे इधरश्री पांडे का इस कदर दबदबा था कि जांच को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। हमने आपको( पार्ट वन ) में बताया था। इस नियुक्ति के खिलाफ देश के विख्यात मरम के विशेषज्ञ चिकित्सक प्रोफेसर डॉक्टर कुलपति सुनील कुमार जोशी ने पत्रांक 137 ; 21 -4 2022 को सचिव आयुष एवं आयुष शिक्षा अनुभाग उत्तराखंड शासन उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर श्री पांडे की नियुक्ति पर आपत्ति की थी; परंतु इसके बाद भी शासन ने इसको गंभीरता से नहीं लिया; और इनके पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। गौर करने की बात यह है कि यदि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय समाचार पत्रों में रिक्त पद के लिए प्रकाशित करते तो हजारों पीएचडी करे हुए आयुर्वेदिक डॉक्टर बेरोजगार बैठे हुए हैं जबकि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की ही नियुक्ति हो सकती है …

😲जिस पद पर जूनियर स्कूल के पीटी टीचर की लगातार प्रमोशन होता रहा यह नियमों का खुलेआम उल्लंघन के साथ-साथ भ्रष्टाचार का खुला नंगा नाच है। इस पद पर केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की नियुक्त हो सकते हैं। गौर करने की बात यह है कि यदि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय समाचार पत्रों में रिक्त पद के लिए प्रकाशित करते तो हजारों पीएचडी करे हुए आयुर्वेदिक डॉक्टर बेरोजगार बैठे हुए हैं जबकि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में केवल आयुर्वेदिक डॉक्टर की ही नियुक्ति हो सकती है….

👉परंतु भ्रष्टाचार कि इस गंगोत्री में ऐसे एक जूनियर पीटी टीचर को लाकर बैठा दिया है जो पूरे सिस्टम को मुंह चिढ़ा रहा है? आश्चर्यचकित बात यह है कि युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास विभाग है। आश्चर्यचकित बात यह है कि ईमानदार भारत में विख्यात डॉक्टर प्रोफ़ेसर कुलपति सुनील कुमार जोशी द्वारा शासन को भेजा गया पत्र की प्रतिलिपि भी पर प्रकाशित की है। इससे बड़ा प्रमाण क्या हो सकता है? जिस कुलपति के अधीनस्थ कर्मचारी काम कर रहा हो; उसी की नियुक्ति पर कुलपति ने आपत्ति पति उठाई हो इससे बड़ी शर्मनाक बात और क्या हो सकती है ? ऑफिस शासन में बैठे अफसर श्री पांडे को बचाने में क्यों लगे हुए हैं यह समझ से परे है? अब देखना यह होगा कि सीएम साहब इस पर क्या कदम उठाते हैं? (अभी तो और खेला बाकी है) । पार्ट 3 । जारी…..

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