बिग ब्रेकिंग हल्द्वानी: 😟महान नेता की पुण्यतिथि प्रथम एवं श्रद्धांजलि! 👉25 बरस तक कवरेज करता रहा इस महान नेता की@ विशेष प्रमुख कुछ झलकियां#

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हल्द्वानी अशोक गुलाटी एडिट इन चीफl 11 जून कोविड-19 हान नेता डॉक्टर इंदिरा हर जी से मेरी बात हुई थी वह दिल्ली में थी और बता रही थी कि इस बार कोई भी सीएम का चेहरा नहीं होगा सब कांग्रेस पार्टी मिलकर चुनाव लड़ेंगे और कांग्रेस की भारी सरकार बनेगीl 13 जून को एक मानुस घंटी प्रातः मोबाइल पर बजी उस पर एक बड़े नेता ने कहा डॉक्टर इंदिरा हरदेश नहीं रहे इस पर मैं अवाक रह गया मैंने उस नेता को खरी-खोटी सुना जी आपको शर्म आनी चाहिए ऐसी मजाक करते हो जिस पर उसने कहा नहीं बीवी नहीं रही आप विश्वास मानिए मुझे लगा कि मेरी जमीन की धरती खिसक गई है फिर मैंने दिल्ली कॉल मिलाया उसके बाद दीदी के मौत की पुष्टि हुई सैकड़ों कॉल मेरे पास आते रहे कि दीदी की कैसे मृत्यु हुई कब ला रहे हैं अगर हो गया विश्वास मानी है मैं ईश्वर की सौगंध खाकर खड़ा हूं सपने में मुझे 5 से 6 बार आ चुकी है उन्होंने कुछ बातें बताई हैं वह आपसे नहीं कर सकताl 25 साल से अधिक मैं उनके संपर्क में रहा और उनकी हर खबर को कवरेज करता रहा जब वह चुनाव हार गई थी तो उन्होंने मुझसे कहा था कि पहला महान तुम मेरा भाई हो जिसके मैंने जिनके सैकड़ों काम किए हो अब नहीं आ रहे हैं तुम फिर भी आ रहे हैं हमने कहा दीदी हम तो आपके भक्त हैं आप सरकार में रहे या ना रहे कौन तू हम हमेशा आपके साथ रहेंगे हमने बहुत नजदीक से दीदी को देखा है कड़क आवाज दिल मोम की तरह गरीबों की मसीहा चाहे वह किसी भी पार्टी का हो सभी का कार्य करती थी एक बात मैं वर्तमान में हाईटेक नेताओं को प्रेरणा देना चाहूंगा मेरे जीवन की 35 साल की पत्रकारिता में वह महान एक ऐसी नेता थी जिसके दरवाजे 24 घंटे खुले थे कोई भी बिना रोक-टोक के उनके बेडरूम तक आम व्यक्ति चला जाता था जबकि एक छोटे से नेता को भी पद मिल जाता है तो वह अपनी गाड़ी घर के पीछे रख देता है और खबर भिजवा देता है कि घर में नहीं है परंतु इनके यहां 24 घंटे कोई भी गरीब व्यक्ति आता था दीदी से मुलाकात कर सकता था दीदी मुझे एक परिवार का सदस्य मानती थी और जीवन में जब मैं यह लिख रहा हूं तो मन में बड़ी पीड़ा हो रही है आज भी विश्वास नहीं होता कि दीदी हमारे बीच में नहीं है हल्द्वानी वासियों प्रदेशवासियों का एक महत्वपूर्ण सपना था किसी जी को एक बार मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते थे वह सपना पूरा नहीं हो सका जिसकी सभी कल्पना कर रहे थे कि एक बार दीदी को मुख्यमंत्री बनना देखना चाहते थे परंतु ऊपर वाले को और भी कुछ मंजूर था उसके आगे किसी की भी नहीं चलती है मृत्यु से 2 दिन पूर्व दीदी की आवाज में था दीदी कह रही थी पता नहीं क्यों आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है चाहे वह कितनी भी बीमार क्यों ना हो वह हमेशा हल्द्वानी वासियों के लिए सोचती थी करुणा काल में भी जब उनको करो ना हो गया था सैकड़ों लोगों ने उनके ठीक होने की ईश्वर से प्रार्थना की थी पर वह ठीक होकर आ गई थी और जनता की समस्या की सेवा में लग गई थीl इस युग में हमने एक महान देवी नेता को खो दिया है जिसकी भरपाई होना नामुमकिन है अब उनके पुत्र सुमित हृदेश के कंधे पर हल्द्वानी वासियों ने जिम्मेवारी दी है और आशा करते हैं कि वह भी दीदी के दिखाए हुए मार्गों पर विकास की ओर चलकर हल्द्वानी वासियों का सपना पूरा करेंगे बरहाल मैं अपनी बात को विराम देता हूं स्वर्गीय महान नेता हम सबकी प्रिय दीदी को आज सच्ची श्रद्धांजलि देता हूं कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करेंl

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