ब्रेकिंग: हिंदी पत्रकारिता पर विशेष! 35 बरस का सफर ऐसे संघर्षपूर्ण रहा! ….अब पत्रकारिता….+कवरेज के दौरान भूखे प्यासे रात सोना पड़ता था; दो बार जान जाते-जाते बची; पत्रकारिता के कारण किसी ने नौकरी भी नहीं दी ? अब पत्रकारिता मिशन नहीं शुद्ध व्यवसाय; कईयों को ए बी सी का भी ज्ञान नहीं आईडी पकड़कर घूम रहे हैं और अपने आप को तीर खा समझ रहे हैं? दिशाहीन होती जा रही पत्रकारिता अत्यंत चिंता का विषय; सैकड़ों पत्रकारों की यूनियन; अपने को शंभू मान रहे हैं पत्रकारों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है?

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दैनिक जागरण 26 वर्ष पूर्व फाइल कॉपी

27 वर्ष पूर्व दैनिक जागरण फाइल

(अशोक गुलाटी एडिटर इन चीफ उत्तरांचल देवभूमि माया समाचार पत्र एवं देवभूमि मायान्यूज़ पोर्टल )। आज हिंदी पत्रकारिता के शुभ अवसर पर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई ।आज से 35 वर्ष पूर्व पत्रकारिता शुरू की थी उस समय मन में एक मिशन था काम करने का जज्बा था निस्वार्थ समाजसेवी का सर पर भूत सवार था और इस मिशन को बहुत ही सफलता पूर्ण निभाने का प्रयास किया इस दौरान कई कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा समाचार पत्रों के प्रमुखों ने हर तरफ से उत्पीड़ित किया कई बरस तक दैनिक जागरण हिंदुस्तान समाचार पत्र संध्या दैनिक सहित कई मैगजीन में कार्य किया परंतु सब जगह से अपेक्षा ही मिली। आज से 17 वर्ष पूर्व वीकली उत्तरांचल देव भूमि माया मैगजीन शुरू की लोगों ने जमकर आलोचना की ज्यादा दिन तक समाचार पत्र नहीं चल पाएगा जो कि जो क्वालिटी क्लेवर समाचार पत्र का दिया था वह राष्ट्रीय स्तर का था बरहाल हमारी टीम के साथी संघर्ष करते रहे और संघर्ष और ईमानदारी का नतीजा यह हुआ आज समाचार पत्र कुमाऊं का प्रतिष्ठित अखबारों में गिना जाता है वही जब 2 साल पूर्व हमने देवभूमि माया न्यूज़ पोर्टल चैनल चालू किया आपके आशीर्वाद से आज सिर्फ गति से आगे बढ़ रहा है अपने 35 साल के अनुभव मैं इतना आपको बताना चाहूंगा कई बार ऐसा अवसर प्रदान हुआ नेताओं के साथ कवरेज करने गए और रात को भूखे पैसे सोना पड़ कवरेज के दौरान दोबारा ऐसा भी समय आया है की मौत के मुंह से बाल बाल बचे चाहे वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी हैं बीजेपी बड़े नेता आदरणीय भगत सिंह कोश्यारी जी अजय भट्ट जी स्वर्गीय बच्चे सिंह रावत जी स्वर्गीय डॉ इंदिरा हरदेश बच्चे सिंह रावत जी हूं सहित जितने भी आज बड़े नेता हैं सब के संघर्ष के समय में उनके साथ कवरेज करें एक बार थोड़ा सा समय आया इस प्रकार का से अजीज होकर नौकरी की तलाश में दिल्ली चला गया वहां इसलिए फैक्ट्री मालिक ने नौकरी नहीं दी क्योंकि उसने कहा कि आप पहले पत्रकार है चुके हैं इसलिए वहां पर भी नौकरी नहीं मिली कवरेज के दौरान कई कई किलोमीटर तक पैदल चलते रहे एक बात किया आपके साथ शेयर करूंगा 28 दिसंबर 90 को सरायखेत रानीखेत में बर्फीला तूफान आया था कई लोग इसमें दफन हो गए थे मैं और पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान में गवर्नर महाराष्ट्र भगत सिंह कोश्यारी जी केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट सहित कई अन्य नेता 5 फुट बर्फ में 18 घंटे तक पैदल चलकर कवरेज की थी …

इसी तरह 8 दिसंबर 90 को रानीखेत में मुलायम सिंह के आने पर रानीखेत गोलीकांड में भी बाल-बाल बचा था इसी तरह खटीमा गोलीकांड में भी तहसील में गोली कांड के दौरान भी कवरेज में बाल-बाल बच गए थे इसी तरह कवरेज के दौरान कई घटनाएं घटित हुई हैं मैं आपको अगली बार विस्तार से जानकारी दूंगा धन्यवाद जारी…. पार्ट वन

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