ब्रेकिंग: देहरादून एम्स के डॉक्टरों का आयुष दवाओं के खिलाफ सलाह देना आयुष चिकित्सा पद्धतियों का अपमान, लिखित में मांगनी पड़ी माफी: डॉ० पसबोला

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देहरादून: विशेष संवाददाता अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ), नई दिल्ली के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी विभाग द्वारा पिछले माह गुर्दे (किडनी) से जुड़ी एक बीमारी के प्रति लोगों को बुकलेट बांटी गए। लगभग 12-14 पन्नों की बुकलेट में जहां बीमारी, लक्षण एवं बचाव आदि के बारे में पूरी जानकारी दी गयी थी, वहीं इसमें होम्योपैथिक एवं यूनानी आदि चिकित्सा पद्धतियों के सलाह एवं दवाओं के इस्तेमाल से दूर रहने का भी जिक्र किया गया था।

राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, उत्तराखण्ड(पंजीकृत) के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ० डी० सी० पसबोला ने इस पर आपत्ति जताते हुए नाराजगी व्यक्त की है एवं‌ इसे आयुष चिकित्सा पद्धतियों का अपमान बताया। इसे एम्स के डॉक्टरों की आयुष चिकित्सा पद्धतियों के प्रति अज्ञानता एवं अल्प ज्ञान होना तथा साथ ही एलोपैथी के अपेक्षा आयुष चिकित्सा पद्धतियों को हीन समझने की विकृत मानसिकता का परिचायक बताया।

डॉ० पसबोला ने आगे बताया कि इस बुकलेट के बारे में जब राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग को सूचना मिली तो आयोग के सचिव डॉ० तारकेश्वर जैन ने एम्स निदेशक डॉ० रणदीप गुलेरिया को पत्र लिखकर एम्स प्रशासन की ओर से सम्बन्धित विभाग की इस गतिविधि पर कार्रवाई करने को कहा। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया तो एम्स डॉक्टरों ने लिखित में माफी मांगते हुए इसे एक गलती माना और बताया कि हिन्दी और‌ इंग्लिश भाषा की दोनों ही बुकलेट्स से इसे हटा दिया गया है। साथ ही भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने का विश्वास भी दिलाया।

वहीं भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखण्ड के अध्यक्ष डॉ० जे० एन० नौटियाल ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी भी कुछ बड़बोले एलोपैथिक डॉक्टर आयुर्वेद, पंचकर्म, होम्योपैथी और अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धति की चिकित्सा एवं औषधियों के बारे में आए दिन भ्रामक एवं तथ्य हीन जानकारी रोगियों को देते रहते हैं जिससे रोगियों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। मैं 30 वर्षों से लोगों को यह समझाने का प्रयास कर रहा हूं की हर चिकित्सा पैथी की अपनी स्ट्रैंथ और वीकनेस हैं और और दुनिया की सबसे बड़ी पैथी सिम्पैथी है जो कि सभी चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों में आज कम देखी जाती है ऐसे चिकित्सकों के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धति के राष्ट्रीय आयोग द्वारा बार-बार वैधानिक चेतावनी के बाद भी यदि ऐसा दुष्प्रचार किया जाता है तो आयोग को ऐसे चिकित्सकों की डिग्री को निरस्त या निलंबित करने की संस्तुति का अधिकार प्राप्त है इस संस्तुति के आधार पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग तत्काल कार्रवाई करने के लिए बाध्य है
इसलिए सभी चिकित्सकों को इस देश की विधि द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धतियों का सम्मान करना चाहिए और अपनी पैथी की स्ट्रैंथ और वीकनेस पहचान कर केरल राज्य की तरह आपस में जनहित एवं रोगी हित में उसका इलाज़ या संबंधित कोई रिफर करना चाहिए।

संघ के प्रान्तीयता उपाध्यक्ष डॉ अजय चमोला ने भी एम्स डॉक्टरों के इस कृत्य की घोर निन्दा की है।
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